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Saturday, 8 August 2015
Sunday Special - पॉर्न का पंचनामा
22:58
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पॉर्न का पंचनामा
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इसे जो देखते हैं, वे इसके बारे में कुछ बोलना नहीं चाहते। जो नहीं देखते, वे इस पर बात नहीं करना चाहते और जो इसे समझते हैं, वे इसे बुरी बला मानते हैं। यह तासीर है पॉर्न के तीखे नशे की। इस नशे के सुरूर और इससे जुड़े सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश कर रहे हैं
पॉर्न पर लगने वाले इस आरोप को यह तर्क सही साबित करता है कि पॉर्न देखने वाला हर शख्स भले ही कोई रेपिस्ट न हो लेकिन रेप की घटनाओं को अंजाम देने वाले अमूमन पॉर्न के शौकीन होते ही हैं। पुलिस से जुड़े कई सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि रेप करने वालों के मोबाइल और कंप्यूटरों से काफी पॉर्न कंटेंट बरामद होता है। यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह के मुताबिक कई रेपिस्ट ने इस बात को कबूला है कि उन्हें रेप करने का ख्याल पॉर्न देखने के बाद ही आया।
सोशल वर्कर रंजना कुमारी का कहना है कि पॉर्न मूल रूप से महिला विरोधी और हिंसक विचारधारा को बढ़ावा देता है। निर्भया के साथ हुए रेप की घटना में जिस तरह की बर्बरता सामने आई थी, उसके पीछे भी एक वजह पॉर्न में दिखाई जाने वाली हिंसक गतिविधियां थीं। उनके अनुसार पॉर्न महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई (चीज समझना) करने का जरिया है, जो महिला उत्पीड़न को बढ़ावा देता है। सेक्सॉलजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी इस तरह की घटनाओं के लिए पूरी तरह से पॉर्न को दोषी नहीं मानते। उनके मुताबिक पॉर्न का बुरा असर ज्यादातर उन्हीं पर ही पड़ता है, जिनकी सेक्स एजुकेशन कम होती है। यहां सेक्स एजुकेशन का मतलब सेक्स के बारे में सबकुछ जानना न होकर, इससे जुड़ा सही आचरण है। डॉ. कोठारी के अनुसार सेक्स एजुकेशन का मतलब सिर्फ यह जानना नहीं है कि कौन से बॉडी पार्ट का क्या फंक्शन है बल्कि यह भी है कि महिला और पुरुष की इसमें बराबर की भागीदारी जरूरी है। दोनों की अपनी जरूरतें और सीमाएं हैं। कई बार देखने में आया है कि पढ़े-लिखे पुरुष भी सेक्सुअल एक्टिविटी से जुड़ी इन बातों को नहीं समझ पाते और सेक्स में स्त्री की इच्छा का सम्मान नहीं करते।
वैज्ञानिकों की मानें तो पॉर्न देखने से इंसान के दिमाग का एक खास हिस्सा इससे डैमेज हो जाता है। जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट फॉर ह्यूमन डिवेलपमेंट के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में पाया कि जो लोग पॉर्न देखने के आदी हो जाते हैं, अमूमन उनके दिमाग में मौजूद 'स्ट्राएटम' छोटा रहता है। 'स्ट्राएटम' दिमाग का वह हिस्सा है जिसमें 'प्रेरणा और पाने की इच्छा' जैसी गतिविधियां प्रॉसेस होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादा पोर्न देखने से दिमाग के इस हिस्से को चोट पहुंचती है। इस तरह की रिसर्च करने वाली डॉ. शिमाने का कहना है कि दिमाग का एक और हिस्सा है जो स्ट्राएटम का पार्ट है तब सक्रिय हो जाता है जब लोग पॉर्न देखते हैं। इस जर्मन रिसर्च में 21-45 साल के 64 पुरुषों को शामिल किया गया। इनसे पॉर्न देखने की आदतों और मस्तिष्क के रिएक्शन का अध्ययन किया गया।
रेप और पॉर्न के कनेक्शन को कई एक्सपर्ट्स इस तर्क से खारिज करते हैं कि रेप उन जगहों पर भी होता है जहां पॉर्न की पहुंच नहीं है। देश के दूर-दराज के गावों में भी रेप होते हैं लेकिन वहां पर पॉर्न नहीं देखा जाता। इसका मतलब साफ है, सिर्फ इकलौता पॉर्न रेप के लिए जिम्मेदार नहीं है। वह कई कारणों में एक कारण हो सकता है।
शादी को बर्बाद करता है पॉर्न
पत्नी घरलू काम के बोझ के साथ ऑफिस भी संभाल रही है लेकिन पति को पॉर्न देखने से फुर्सत नहीं है। पॉर्न के लत का हथौड़ा रिश्तों पर ऐसी चोट करता है कि रिश्तों गहरी दरार पैदा होने लगती है।
रिलेशनशिप काउंसलर और साइकॉलजिस्ट अरुणा ब्रूटा का कहना है कि पॉर्न देखने की आदत घरों को तोड़ने का काम कर रही है। जिस पति के पास अपनी पत्नी के साथ कुछ वक्त बिताने का टाइम नहीं है, वह घंटों पॉर्न देखता रहता है। जिंदगी वैसे भी बिजी है और पॉर्न के शौकीन अपना कीमती वक्त इसमें जाया करते हैं। उनका कहना है कि कई लोग इस तरह की समस्या लेकर मेरे पास आए हैं कि पॉर्न ने उनकी जिंदगी को उथल-पुथल कर रखा है। पॉर्न में बॉडी स्ट्रक्चर और एक्टिविटी के लेवल पर जो परफेक्शन दिखाया जाता है, पॉर्न देखने वाला उसी परफेक्शन की चाह अपने जीवनसाथी में करने लगता है। असल जिंदगी में परफेक्शन मुमकिन नहीं और यही कारण है कि उसे अपना जीवन साथी में आकर्षण नजर नहीं आता। इसी कारण पॉर्न में दिखाई जाने वाली हिंसा जहां एक तरफ शादी में रेप जैसी चीज को जन्म देती है, वहीं पॉर्न का ग्लैमर शादी के बाहर संबंधों को बढ़ावा देता है।
डॉ. कोठारी पॉर्न को सेक्स की दबी इच्छाओं को बाहर निकालने का सबसे अच्छा साधन मानते हैं लेकिन एक शर्त के साथ। पॉर्न देखने वाला अगर यह समझता है कि मूवी में दिखाए जाने वाले विजुअल असल जिंदगी में मुमकिन नहीं हैं तो पॉर्न काम के बोझ के नीचे दबे इंसान में सेक्स की इच्छा को जगाने का अच्छा जरिया साबित हो सकता है। डॉ. कोठारी मानते हैं कि सेक्स इंसानी प्रकृति का हिस्सा है और इसके बारे में सही जानकारी का अभाव इस प्रकृति को विकृति में तब्दील कर देता है। रंजना कुमारी का कहना है कि यह बात सही है कि सेक्स इंसानी नेचर का हिस्सा है लेकिन इसे किस हद तक स्वीकार किया जाए, इसे भी समझना जरूरी है। पॉर्न से कोई भी इंसान अपने मन की दबी इच्छाओं को नहीं निकालता बल्कि उसे और हिंसक तरीके से मौका मिलते ही बाहर निकालता है।

सेक्स एजुकेशन देता है पॉर्न?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेक्स के बारे में सही जानकारी न मिल पाने की वजह से ही लोग पॉर्न की तरफ डायवर्ट होते है। सीनियर सायकायट्रिस्ट डॉ. मनीष जैन का कहना है कि सही सेक्स एजुकेशन से पॉर्न देखने की आदत पर लगाम लगाना मुमकिन होगा। डॉ. कोठारी के अनुसार सेक्स एजुकेशन को सिलेबस का हिस्सा बनाने की जिम्मेदारी सरकार की है और ऐसा न कर पाने की वजह से पैदा होने वाली दिक्कतों को सरकार पॉर्न के मत्थे मढ़ रही है। पॉर्न सेक्स एजुकेशन के लिए नहीं इस्तेमाल किया जा सकता क्योंकि इसे फिल्म की तरह शूट किया जाता है। जिस तरह किसी फिल्म को देख कर हम रियल लाइफ की चीजें नहीं सीख सकते, उसी तरह पॉर्न को देख कर सेक्स की समझ नहीं पैदा कर सकते। एंड्रॉमेडा एंड्रॉलजी एंड सेक्सुअल मेडिसिन सेंटर, हैदराबाद के डायरेक्टर डॉ. सुधीर कृष्णमूर्ति का मानना है कि सही सेक्स एजुकेशन का अभाव दोधारी तलवार का काम कर रहा है। गलत जानकारियां और पॉर्न के बुरे प्रभाव बढ़ते जा रहे हैं। कई लोग यह भी मानते हैं कि पॉर्न से शारीरिक कमजोरी होती है। डॉ. कोठारी इस धारणा को सही नहीं मानते। उनका कहना है कि सेक्स एजुकेशन पाया इंसान पॉर्न देख कर खुद को एक या दूसरी तरह से संतुष्ट कर लेता है। पॉर्न देखने भर से कोई इंसान कमजोर नहीं हो सकता। कमजोर होना, सिर घूमना या कंपकपी आने जैसी बातें सिर्फ वहम है।
तकरीबन हर एक्सपर्ट मानता है कि पॉर्न कहीं-न-कहीं लोगों में भ्रम और कॉम्प्लेक्स पैदा करता है। पॉर्न देखने वाले सेक्स करने की अपनी क्षमता और फ्रीक्वेंसी की तुलना पॉर्न फिल्मों से करने लगते हैं। प्राइवेट पार्ट के साइज से लेकर महिलाओं के शरीर से जुड़े कई तरह के कॉम्प्लैक्स पॉर्न की देन हैं। यह कई और गलत चीजों को भी जन्म देता है। साइकॉलजिस्ट अरुणा ब्रूटा के मुताबिक जो लोग पॉर्न के चंगुल में फंसे होते हैं, उन्हें अक्सर सिगरेट और शराब की लत भी लग जाती है। पॉर्न देखने की लत से पीड़ित इंसान कहीं-न-कहीं कॉन्फिडेंस भी खो चुका होता है और इससे उबरने के लिए वह नशे का सहारा लेता है। नशा उसकी मदद तो नहीं करता बल्कि परेशानियों को और बढ़ा देता है। इस तरह की लत का शिकार इंसान दरअसल इम्पल्सिव डिसऑर्डर का शिकार होता है और इसके बहाव में हर बुरी लत की तरफ खिंचता जाता है।
सीनियर साइकायट्रिस्ट डॉ. संजय चुग का मानना है कि जिस तरह हर चीज की अति बुरी है, उसी तरह पॉर्न की अति भी बुरी है। अगर पॉर्न देखने की वजह से आपकी जिंदगी उथल-पुथल हो गई है तो इसका मतलब यह अपना बुरा असर दिखा रही है। पॉर्न देखने के एडिक्शन को इस बात से नहीं नापा जा सकता कि कोई कितनी देर तक पॉर्न देखता है। वैज्ञानिकों की मानें तो पॉर्न देखने से इंसान के दिमाग का एक खास हिस्सा इससे डैमेज हो जाता है। जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट फॉर ह्यूमन डिवेलपमेंट के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में पाया कि जो लोग पॉर्न देखने के आदी हो जाते हैं, अमूमन उनके दिमाग में मौजूद 'स्ट्रेटियम' छोटा रहता है। 'स्ट्राएटम' दिमाग का वह हिस्सा है जिसमें 'प्रेरणा और पाने की इच्छा' जैसी गतिविधियां प्रॉसेस होती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादा पोर्न देखने से दिमाग के इस हिस्से को चोट पहुंचती है। इस तरह की रिसर्च करने वाली डॉ. शिमाने का कहना है कि दिमाग का एक और हिस्सा है जो स्ट्राएटम का पार्ट है तब सक्रिय हो जाता है जब लोग पॉर्न देखते हैं। इस जर्मन रिसर्च में 21-45 साल के 64 पुरुषों को शामिल किया गया। इनसे पॉर्न देखने की आदतों और मस्तिष्क के रिएक्शन का अध्ययन किया गया।
अगर पॉर्न देखने की आदत की वजह से पर्सनल, सोशल और प्रफेशनल लाइफ पॉर्न देखने की वजह से बुरी तरह प्रभावित हो रही है तो इसका मतलब है कि पॉर्न के एडिक्शन का शिकंजा कस चुका है। पॉर्न बैन करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। किसी भी चीज को जितना बैन किया जाता है, उसे देखने की चाहत बढ़ती जाती है। यह बात हर तरह के नशे पर लागू होती है - सिगरेट हो, शराब हो या फिर कोई दूसरा नशा।
डॉ. कोठारी का मानना है कि पॉर्न देखने में कोई बुराई नहीं है जब तक कि इसे एडल्ट एंटरटेनमेंट के लिए देखा जाए। पॉर्न प्रफेशनल्स की बनाई और पब्लिक डिस्प्ले के लिए बनाई गई मूवीज़ हैं और इन्हें ऐसे ही देखना चाहिए। इसे जिंदगी का हिस्सा बनाने की कोई जरूरत नहीं। डॉ. चुग का भी मानना है कि कोई पॉर्न देखे या न देखे, इस पर फैसला वह इंसान ही कर सकता है। जहां तक बात है सेहत पर पड़ने वाले असर की तो जब तक इंसान अपनी जिंदगी को नॉर्मल तरीके से एक सामाजिक इंसान की तरह जी रहा है और पॉर्न का उसकी जिंदगी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ रहा, तब तक पॉर्न देखने में कोई बुराई नहीं है।

बच्चों के लिए जहर है पोर्न?
सरकार ने भी पॉर्न से बैन हटा दिया है लेकिन चाइल्ड पॉर्न पर बैन कायम रखा है। चाइल्ड पॉर्न की समस्या से भारत ही नहीं, अमेरिका जैसे बड़े देश भी जूझ रहे हैं। हालांकि चाइल्ड पॉर्न पर पाबंदी तो लगा सकते हैं लेकिन बच्चों को पोर्न देखने से कैसे रोका जाए? तमाम एक्सपर्ट्स इसे अपराध के सबसे बुरे रूप के तौर पर देखते हैं। अरुणा ब्रूटा का कहना है कि बच्चों की मोबाइल फोन पर आसान पहुंच इसे और खतरनाक बना रही है। बच्चे कम उम्र से ही उन चीजों को देखने लगते हैं, जिनकी समझ उन्हें बिल्कुल नहीं होती। आजकल बच्चों की समझ तकनीक को लेकर पिछली जेनरेशन से काफी ज्यादा है और इंटरनेट उनके लिए किसी भी चीज तक आसानी से पहुंचने का साधन बन रहा है। कंप्यूटर से लेकर टैब और मोबाइल तक, सब पर आराम से पॉर्न देखा जा सकता है। अक्सर देखने में आता है कि जो बच्चे बचपन में चोरी करते हैं, ज्यादा ऐशो-आराम का जीवन बिताते हैं और किसी भी चीज की इच्छा होने पर उसे आसानी से पा लेते हैं, आगे जाकर पॉर्न देखने की आदत का शिकार होते हैं। बच्चों को पॉर्न से दूर रखने का एक ही तरीका है कि पैरंट्स खुद को रोल मॉडल बनाएं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्राणायाम और ध्यान जैसी चीजों के साथ फिजिकली एंगेज रखने वाली एक्टिविटी में बच्चों को लगाने से पॉर्न से बच्चों को बचाया जा सकता है।
- तकरीबन हर एक्सपर्ट का मानना है कि बच्चों को पॉर्न से डरा-धमका कर दूर नहीं रखा जा सकता। हां, उन्हें इससे होने वाले नुकसान के बारे में बता कर आगाह जरूर किया जा सकता है।
- सेक्स एजुकेशन का रोल इस मुकाम पर इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यही पॉर्न की उत्सुकता को दबाने का काम करता है। अगर बच्चों को पॉर्न देखना वक्त की बर्बादी और अपनी प्राथमिकताओं में सबसे पीछे नजर आने लगेगा तो उन्हें इस तरह की आदतें पड़ने की संभावना कम हो जाएगी।
- पॉर्न क्यों बुरा है इसके लिए बच्चों को तार्किक जवाब देना ज्यादा जरूरी है। बच्चे को डांटने फटकारने से बेहतर है कि उसे वक्त की बर्बादी और मानसिक रूप से होने वाली परेशानियों के बारे में बताया जाए। उसे यह भी बताया जा सकता है कि एक खास उम्र में पहुंच कर इसे देखने में कोई बुराई नहीं है।
- अरुणा ब्रूटा का कहना है कि अगर बच्चे की मां फोन पर लगातार अपने मेकअप और फैशन के बारे में और पिता पार्टियों और एंजॉय करने की बातें करते रहेंगे तो उन्हें सुन कर बच्चे के मन में भी एंजॉय करने का भाव पैदा होने लगेगा। उसके भीतर भी 'फिजिकल प्लेजर' की समझ पैदा होगी और वह इस तरह की एक्टिविटी में आगे बढ़ने लगेगा।
Block addresses - किसी खास यूआरए या आईपी अड्रेस को लॉक कर सकते हैं।
Filter content - इस फिल्टर के जरिए कुछ खास कंटेंट फिल्टर किया जा सकता है।
Manage usage - इसके जरिए इंटरनेट असेस और टाइम को कंट्रोल किया जा सकता है।
Monitor activities - इसके जरिए जाना जा सकता है कि किस वक्त कंप्यूटर पर क्या गतिविधि की गई है।
- अक्सर पॉर्न देखने की शुरुआत सर्च इंजन से होती है। कोई खास शब्द के जरिए पॉर्न साइट तक पहुंचा जाता है। इसका सबसे आसान तरीका है पैरंटल लॉक लगाना
Start button पर जाएं फिर Control Panel पर क्लिक करें और User Accounts and Family Safety पर क्लिक करें और Set up parental controls for any user। इसे आप किसी खास पासवर्ड से प्रोटेक्ट कर सकते हैं।
इसमें जाकर आप जिस साइट को चाहें ब्लॉक कर सकते हैं।
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इस महिला के पैरों में निकल आए तीन सींघ, दंग करती तस्वीरें
बड़ा खुलासा, याकूब के जनाजे में दाऊद ने बुलाई थी इतनी भीड़
तो क्या 1993 के मुंबई बम धमाकों का आरोपी और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में बैठकर हिंदुस्तान में अपनी खतरनाक गतिविधियों को अंजाम दे रहा है? पुलिस के ताजा खुलासे तो इसी तरफ इशारा कर रहे हैं।
मुंबई पुलिस के सूत्रों के मुताबिक याकूब मेमन की फांसी के बाद दाउद ने फोन करके शहर में अपने खास लोगों से बड़ी तादाद में उसके जनाजे में शामिल होने को कहा था।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि हमारे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि दाऊद और छोटा शकील ने मुंबई में मौजूद अपने साथियों को फोन करके जनाजे में शामिल होकर अपनी ताकत दिखाने को कहा था।
पुलिस का कहना है याकूब के जनाजे में इतनी बड़ी भीड़ इसीलिए जुटी क्योंकि खुद दाऊद और छोटा शकील ने लोगों को फोन करके बुलाया।
पुलिस के मुताबिक इनके बुलाने पर ही माहिम स्थित याकूब के घर पर जनाजे में 10 हजार और मरीन लाइन स्थित कब्रिस्तान में, जहां याकूब को दफनाया गया, वहां भी 10 हजार लोगों की भीड़ जुटी।
वहीं मुस्लिम समुदाय के नेताओं का कहना है कि जनाजे में इतनी भीड़ जुटने के पीछे असली वजह यह थी कि बहुत सारे लोगों को मालूम ही नहीं था कि याकूब मेमन कौन है और उसने किया क्या था, और लोग यही जानने के लिए जनाजे में शामिल हुए थे।
इस बीच, सूत्रों का कहना कि दाऊद और छोटा शकील ने शुरुआत में इसलिए कोई प्रतिक्रिया या धमकी नहीं दी, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट याकूब की दया याचिका स्वीकार कर लेगा।
दाऊद और शकील यह माने बैठे थे कि अगर उन्होंने अभी किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया दी तो इससे याकूब की दया याचिका पर विपरीत असर पड़ेगा और यह खारिज हो सकती है।
और यही कारण था कि जैसे ही याकूब को फांसी पर लटकाया गया, उसके तुरंत बाद छोटा शकील ने एक इंटरव्यू के जरिए परोक्ष रूप से भारत को परिणाम भुगतने की धमकी दे डाली।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक शकील की धमकी पूरे देश के लिए एक धमकी है और इस धमकी के बाद यह साबित हो गया है कि 1993 के बम धमाके उसी की करतूत थी।
मुंबई पुलिस के सूत्रों के मुताबिक याकूब मेमन की फांसी के बाद दाउद ने फोन करके शहर में अपने खास लोगों से बड़ी तादाद में उसके जनाजे में शामिल होने को कहा था।
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि हमारे पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि दाऊद और छोटा शकील ने मुंबई में मौजूद अपने साथियों को फोन करके जनाजे में शामिल होकर अपनी ताकत दिखाने को कहा था।
पुलिस का कहना है याकूब के जनाजे में इतनी बड़ी भीड़ इसीलिए जुटी क्योंकि खुद दाऊद और छोटा शकील ने लोगों को फोन करके बुलाया।
पुलिस के मुताबिक इनके बुलाने पर ही माहिम स्थित याकूब के घर पर जनाजे में 10 हजार और मरीन लाइन स्थित कब्रिस्तान में, जहां याकूब को दफनाया गया, वहां भी 10 हजार लोगों की भीड़ जुटी।
वहीं मुस्लिम समुदाय के नेताओं का कहना है कि जनाजे में इतनी भीड़ जुटने के पीछे असली वजह यह थी कि बहुत सारे लोगों को मालूम ही नहीं था कि याकूब मेमन कौन है और उसने किया क्या था, और लोग यही जानने के लिए जनाजे में शामिल हुए थे।
इस बीच, सूत्रों का कहना कि दाऊद और छोटा शकील ने शुरुआत में इसलिए कोई प्रतिक्रिया या धमकी नहीं दी, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट याकूब की दया याचिका स्वीकार कर लेगा।
दाऊद और शकील यह माने बैठे थे कि अगर उन्होंने अभी किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया दी तो इससे याकूब की दया याचिका पर विपरीत असर पड़ेगा और यह खारिज हो सकती है।
और यही कारण था कि जैसे ही याकूब को फांसी पर लटकाया गया, उसके तुरंत बाद छोटा शकील ने एक इंटरव्यू के जरिए परोक्ष रूप से भारत को परिणाम भुगतने की धमकी दे डाली।
पुलिस अधिकारी के मुताबिक शकील की धमकी पूरे देश के लिए एक धमकी है और इस धमकी के बाद यह साबित हो गया है कि 1993 के बम धमाके उसी की करतूत थी।
Monday, 3 August 2015
HERACLEION के खोये शहर की कहानी !
03:50
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दा लॉस्ट वर्ल्ड
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यह केवल एक कथा थी दुर्लभ शहर Thonis-Heracleion की और इसके मिल जाने की उम्मीद किसी को भी नहीं था, लेकिन इसे ढूंढने का कारनामा कर दिखाया फ्रेंच पुरातत्वविद् फ़्रैंक Goddio ने , जो 18 वीं सदी के फ्रांसीसी युद्धपोत की तलाश में थे, Goddio अलेक्जेंड्रिया के समुद्र तट से6.5 किलोमीटर की दूरी पर थे , Thonis-Heracleion शहर पानी के भीतर मिला |
इसमे खंडहर के बीच 64 जहाजों, 700 लंगर, सोने के सिक्कों का खजाना निधि, 16 फीट पर खड़ी मूर्तियों, और भगवान अमुन-गरीब का एक विशाल मंदिर भी मिला और जानवरों के छोटे-छोटे sarcophagi थे प्रसाद के रूप में।
ग्रेनाइट और diorite से बने खंडहर और कलाकृतियों उल्लेखनीय संरक्षित है, और 2300 साल पहले, क्या था संरक्षित हैं, दुनिया के महान बंदरगाह शहरों में से एक Thonis-Heracleion |
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Thonis-Heracleion
इसमे खंडहर के बीच 64 जहाजों, 700 लंगर, सोने के सिक्कों का खजाना निधि, 16 फीट पर खड़ी मूर्तियों, और भगवान अमुन-गरीब का एक विशाल मंदिर भी मिला और जानवरों के छोटे-छोटे sarcophagi थे प्रसाद के रूप में।
ग्रेनाइट और diorite से बने खंडहर और कलाकृतियों उल्लेखनीय संरक्षित है, और 2300 साल पहले, क्या था संरक्षित हैं, दुनिया के महान बंदरगाह शहरों में से एक Thonis-Heracleion |

वीडियो - दा लॉस्ट वर्ल्ड Thonis-Heracleion
Saturday, 1 August 2015
आपका दोस्त कूल या फ़िज़ूल ?
21:00
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दोस्तों आज फ़्रिएन्शिप डे है तुम खुश तो बहुत होंगे | इसो बढ़िया तरीके से सेलिब्रेट करने का मैं भी बनाया होगा , आपके किस्म किस्म के दोस्त भी होंगे | तो अपने दोस्त को पहचानिये की कौनसा दोस्त कौनसी किस्म का है| दोस्तों की आमतोर पर पायी जाने वाली नस्ल |
इनसे बचे
1. चिपकू दोस्त
ये दोस्त हमेशा चिपके रहते है मैगनेट की तरह कैंटीन खाने से लेकर टॉयलेट में शू-शू तक का टास्क ये टास्क साथ-साथ करने में भरोसा करते है |आपको इनकी दिन भर बक-बक सुननी पढ़ती है , कुछ रात मई व्हाट्सप्प या फेसबुक पर भी चाट के ज़रिये जान कहते रहते है |
2.खिसकु दोस्त
वैसे ये दोस्त हमेश आपके साथ-साथ रहते है लेकिन जब भी आपको इनकी ज़रूरत पढ़ती है तो ये वैसे ही गायब हो जाते है जैसे गधे के सर से सींग | है अगर कोई पार्टी सेलीब्रेट करनी हो तो ये आपको ज़रूर नज़र आयंगे | इनसे भी बचने में भलाई है \
3. दुखी दोस्त
दुनिया में इनसे ज़्यादा दुखी कोई नहीं दीखता , किसी के सामने अपना दुखड़ा रोने मई इनके कोई हर्ज़ भी नई | दूसरे इन्हे हमेशा सुखी और खुशहाल नज़र आते है , ये अपनी नेगेटिविटी से आपको नुकसान पंहुचा सकते है , और ये दुनिया के सबसे शिकायतमंद लोगो में से एक है |
4. फ़िज़ूल दोस्त
इनके पास हर मसले पर बोलन के लिए बहगुट कुछ होता है |इन्हे बस फेकने से मतलब होता है | ये अक्सर किसी काम के नहीं होते , और अपने पेरेंट्स के सामने ऐसी बनकर दिखाते है जैसे इनसे अच्छा बचा कोई नहीं , बस फिर समझ ली जिए की आपकी खैर नहीं |
5. मंगता दोस्त
ऐसे दोस्त आपसे कुछ न कुछ मांगते रहते है , कभी पेन-पेंसिल , कभी लंच , कभी पैसे कभी कुछ तो कभी कुछ |ये आपको अपना इतन मानते है के ये आपसे कुछ भी मांगने में शर्म महसूस भी नहीं करंगे |
इनसे बनाये दोस्ती
1. कूल दोस्त
ये दोस्त आपकी लाइफ को मस्त बनाते है , हर मूमेंट को एन्जॉय करना इन्हे आता है |ये जाह होते है रौनक बढ़ा देते है ,हर लेटेस्ट जानकारी उनके पास होती है | ये आमतोर पर शिकायत नहीं करते | पढाई को लेकर भी कूल रहते है थोड़े बहुत नंबर कम आ भी जाये तो कोई मलाल नहीं होता |
2. हेल्पफुल दोस्त
इस केटेगरी के दोस्त हर वक़्त तैयार रहते है |फिर चाहे होमवर्क में हेल्प करना हो , नोट्स शेयर अकरण अहो या प्रोजेक्ट मई हेल्प करना हो , या कोई लड़ाई हो किसी भी सिचुएशन मई ये आपका साथ नहीं छोड़ते | यहाँ तक की आपकी गलती पर पर्दा भी डालते है , है लोग दिल से काफी अच्छे होते है |
3. हंसोड़ दोस्त
इस केटेगरी के दोस्त कफो पॉपुलर होइते है |ये अक्सर सामनेवाले को हसने पर मजबूर कर देते है |
ये साथ होते है तो लगता है कपिल की कॉमेडी क्लास चल रही हो |हालांकि इनकी हसी के ठहाके आस पास वालो को परेशान कर देते है |
4. दबंग दोस्त
इस नस्ल के दोस्त बड़े भाई की तरह आपको हर जगह सुरक्षा देते है इनके होते हुए आपको किसी गार्ड की ज़रूरत नहीं| नुक्सान ये है इन के साथ होने पर मारपीट का डर हमेशा बना रहते है , लेकिन ऐसे दोस्त आपके लिए जान तक देने क लिए रेडी रहते है |
5. स्टार दोस्त
ये अपने दोस्तों में काफी पॉपुलर होते है |अकसर पढाई में अच्छे होते है ,इनकी दोस्ती के लिए वेटिंग लम्बी हो सकती है , इनकी दोस्ती का इंतज़ार करने मई भी कोई कोताही नई क्यू की स्टार का दोस्त भी तो छोटा मोटा स्टार हुआ ना |
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इनसे बचे
1. चिपकू दोस्त
ये दोस्त हमेशा चिपके रहते है मैगनेट की तरह कैंटीन खाने से लेकर टॉयलेट में शू-शू तक का टास्क ये टास्क साथ-साथ करने में भरोसा करते है |आपको इनकी दिन भर बक-बक सुननी पढ़ती है , कुछ रात मई व्हाट्सप्प या फेसबुक पर भी चाट के ज़रिये जान कहते रहते है |
2.खिसकु दोस्त
वैसे ये दोस्त हमेश आपके साथ-साथ रहते है लेकिन जब भी आपको इनकी ज़रूरत पढ़ती है तो ये वैसे ही गायब हो जाते है जैसे गधे के सर से सींग | है अगर कोई पार्टी सेलीब्रेट करनी हो तो ये आपको ज़रूर नज़र आयंगे | इनसे भी बचने में भलाई है \
3. दुखी दोस्त
दुनिया में इनसे ज़्यादा दुखी कोई नहीं दीखता , किसी के सामने अपना दुखड़ा रोने मई इनके कोई हर्ज़ भी नई | दूसरे इन्हे हमेशा सुखी और खुशहाल नज़र आते है , ये अपनी नेगेटिविटी से आपको नुकसान पंहुचा सकते है , और ये दुनिया के सबसे शिकायतमंद लोगो में से एक है |
4. फ़िज़ूल दोस्त
इनके पास हर मसले पर बोलन के लिए बहगुट कुछ होता है |इन्हे बस फेकने से मतलब होता है | ये अक्सर किसी काम के नहीं होते , और अपने पेरेंट्स के सामने ऐसी बनकर दिखाते है जैसे इनसे अच्छा बचा कोई नहीं , बस फिर समझ ली जिए की आपकी खैर नहीं |
5. मंगता दोस्त
ऐसे दोस्त आपसे कुछ न कुछ मांगते रहते है , कभी पेन-पेंसिल , कभी लंच , कभी पैसे कभी कुछ तो कभी कुछ |ये आपको अपना इतन मानते है के ये आपसे कुछ भी मांगने में शर्म महसूस भी नहीं करंगे |
इनसे बनाये दोस्ती
1. कूल दोस्त
ये दोस्त आपकी लाइफ को मस्त बनाते है , हर मूमेंट को एन्जॉय करना इन्हे आता है |ये जाह होते है रौनक बढ़ा देते है ,हर लेटेस्ट जानकारी उनके पास होती है | ये आमतोर पर शिकायत नहीं करते | पढाई को लेकर भी कूल रहते है थोड़े बहुत नंबर कम आ भी जाये तो कोई मलाल नहीं होता |
2. हेल्पफुल दोस्त
इस केटेगरी के दोस्त हर वक़्त तैयार रहते है |फिर चाहे होमवर्क में हेल्प करना हो , नोट्स शेयर अकरण अहो या प्रोजेक्ट मई हेल्प करना हो , या कोई लड़ाई हो किसी भी सिचुएशन मई ये आपका साथ नहीं छोड़ते | यहाँ तक की आपकी गलती पर पर्दा भी डालते है , है लोग दिल से काफी अच्छे होते है |
3. हंसोड़ दोस्त
इस केटेगरी के दोस्त कफो पॉपुलर होइते है |ये अक्सर सामनेवाले को हसने पर मजबूर कर देते है |
ये साथ होते है तो लगता है कपिल की कॉमेडी क्लास चल रही हो |हालांकि इनकी हसी के ठहाके आस पास वालो को परेशान कर देते है |
4. दबंग दोस्त
इस नस्ल के दोस्त बड़े भाई की तरह आपको हर जगह सुरक्षा देते है इनके होते हुए आपको किसी गार्ड की ज़रूरत नहीं| नुक्सान ये है इन के साथ होने पर मारपीट का डर हमेशा बना रहते है , लेकिन ऐसे दोस्त आपके लिए जान तक देने क लिए रेडी रहते है |
5. स्टार दोस्त
ये अपने दोस्तों में काफी पॉपुलर होते है |अकसर पढाई में अच्छे होते है ,इनकी दोस्ती के लिए वेटिंग लम्बी हो सकती है , इनकी दोस्ती का इंतज़ार करने मई भी कोई कोताही नई क्यू की स्टार का दोस्त भी तो छोटा मोटा स्टार हुआ ना |
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भारतीय सर्जन ने कमाल कर हाथ पर उगा दिया कान
भारतीय सर्जन ने कमाल कर हाथ पर उगा दिया कान
03:53
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आर्टिफिशियल कान
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भारतीय सर्जन ने पहली बार मरीज की बांह पर आर्टिफिशियल कान उगाकर फिर उसके शरीर पर लगाने का सफल प्रयोग किया है.
पेट पर नाक या पैर पर हाथ उगा देने और फिर उसे सही जगह लगा देने के बड़े ऑपरेशन की खबरें अक्सर विदेशों से ही आती रही हैं, पर ऎसा कमाल देश में भी हुआ है और इसे किया है दिल्ली के लोक नायक जय प्रकाश अस्पताल (एलएनजेपी) के प्लास्टिक एंड बर्न सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने, उन्होंने मरीज की छाती से चर्बी निकालकर उससे मरीज के ही हाथ पर कान उगाया है, कान पूरी तरह तैयार है और डॉक्टर अब इसे लगाने की तैयारी में हैं.
विभाग के सर्जन डॉ. पीएस भंडारी के मुताबिक यह आर्टिफिशियल कान है, जिसे हमने मरीज की बांह पर उसके ही शरीर के ऊतकों से विकसित किया है, इसके लिए त्वचा के साथ छाती की पसली निकाली गई, फिर उसे तराश कर कान का फ्रेमवर्क बनाया, यह प्रयोग 22 साल के एक युवक पर किया, जिसके दोनों कान जल गए थे, इसके कान बनाने के लिए हमारे पास त्वचा उपलब्ध नहीं थी, ऎसे में पांच-छह माह में कई चरणों में अब इसे पूरा कर पाए.
पहला चरण : छाती से तीस पसलियां निकालीं, जो कि मुलायम हड्डी की तरह होती हैं, फिर मशीन के जरिए इनसे कान का फ्रेमवर्क बनाया.
दूसरा चरण : शुरू में कोशिकाओं को फैलाने वाला इंजेक्शन हाथ में डाला था, इससे गुब्बारे सा उभार आ जाता है, बाद में इसे निकालकर कान का फ्रेमवर्क डाला.
तीसरा चरण : धीरे-धीरे गुब्बारे की जगह कान का आकार बन जाता है, फिर हाथ से इस कान को निकालकर सही जगह लगा दिया जाएगा.
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Friday, 31 July 2015
Monday, 27 July 2015
प्रमाणपत्र बनवाने की कुंजी
02:10
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प्रमाणपत्र बनवाने की कुंजी
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अक्सर जरूरी डॉक्युमेंट्स की याद तब बहुत आती है, जब बनता काम अटक जाता है। एक्सपर्ट्स की मदद से बता रहे हैं जरूरी डॉक्युमेंट्स बनवाने की कुंजी :
बर्थ सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी है
- स्कूल में ऐडमिशन के लिए।
- पासपोर्ट या हर ऐसा डॉक्युमेंट बनवाते वक्त जिसमें उम्र के सबूत की जरूरत होती है।
कौन करता है रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की रहती है।
- दिल्ली में यह काम एमसीडी और एनडीएमसी करती हैं।
- जन्म 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को सूचित कर देना चाहिए।
कौन बनवा सकता है
- माता-पिता या घर का सीनियर मेंबर, या करीबी रिश्तेदार जैसे चाचा, मामा आदि। नौकर या दूर के रिश्तेदार को भेज कर बनवा सकते हैं, लेकिन डॉक्युमेंट में दस्तखत करने के लिए करीबी रिश्तेदार का होना जरूरी है।
कैसे बनवाएं
-हर सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में एक फॉर्मेट पर जन्म की जानकारी लेकर एमसीडी या एनडीएमसी को दे दी जाती है।
- अगर तय वक्त (21 दिन) में यह सर्टिफिकेट न ले सकें तो लोकल एसडीएम ऑफिस जाकर रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। हालांकि हॉस्पिटल के जरिए रजिस्ट्रेशन करारा सहूलियत भरा रहता है।
- ऐप्लिकेशन रिसीव होने के 7 दिनों के अंदर प्रमाण पत्र देना जरूरी होता है।
फीस: पहली बार बनवाने पर यह फ्री दिया जाता है। लेकिन इसके बाद की कॉपी लेने पर प्रति कॉपी 10 रुपये का खर्च आता है।
OBC सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- नौकरियों और सरकारी योजनाओं में मिलने वाली सुविधाओं के लिए।
- स्कूल-कॉलेज में ऐडमिशन के लिए
- अपने बच्चों का ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए
कौन बनाता है
- इसे एरिया के एसडीएम या डीसी ऑफिस से सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक बनवाया जा सकता है।
कैसे बनता है
- दिल्ली सराकर ने इसे बनवाने के लिए ऑनलाइन ऐप्लिकेशन की सुविधा दे रखी है। districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर जाकर अपॉइंटमेंट लिया जा सकता है।
- यहां जाकर आप संबंधित अधिकारी से अपॉइंटमेंट लेकर सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं।
- आपको साथ में भरे हुए फॉर्म की कॉपी और जरूरी डॉक्युमेंट लेकर जाना होता है।
- पहले से वक्त लेने से आप लाइन में लगने से के झंझट और दलालों के चक्कर में पड़ने से बच जाते हैं।
जरूरी डॉक्युमेंट
- पूरा भरा हुआ फॉर्म
- आधार कार्ड या आधार एनरोलमेंट नंबर
- आई कार्ड (इनमें से कम से कम 2) जैसे- पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड
- ऐप्लिकेशन देने वाले का फोटो ऐप्लिकेशन रिसीव करने के बाद ऑफिस में ही खींची गई जाएगी।
- अपने पिता, भाई, बहन या ब्लड रिलेटिव के ओबीसी सर्टिफिकेट की कॉपी
- जहां रह रहे हैं, वहां का अड्रेस प्रूफ जैसे वोटर आईडी या बिजली, पानी या टेलिफोन (लैंडलाइन) का बिल।
परिवार की आय का प्रूफ (आईटीआर या सैलरी स्लिप)
- बेहतर होगा सभी डॉक्युमेंट्स की कॉपी गजटेड ऑफिसर या एमपी/एमएलए से अटेस्ट करा लें।
फीस: फ्री, कितना वक्त लगेगा: 60 दिन
हैंडिकैप्ड कार्ड
क्यों जरूरी
- सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन के लिए, रेलवे में सफर करते वक्त छूट के लिए
कौन बनवा सकता है
- हैंडिकैप कार्ड 40 फीसदी शारीरिक विकलांग (हड्डी संबंधी), 35 फीसदी मानसिक विकलांग, 90 फीसदी तक अंधापन, 90 फीसदी तक बहरापन और पूरी तरह से गूंगा इंसान ही बनवा सकता है।
कौन बनाता है
इसे लोकर एसडीएम ऑफिस से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बनवाया जा सकता है।
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- पूरा भरा ऐप्लिकेशन फॉर्म
- विकलांगता संबंधी डॉक्युमेंट के तौर पर गजटेड ऑफिसर से अटेस्टेड मेडिकल सर्टिफिकेट
- राशनकार्ड के पहले तीन पेजों की फोटोकॉपी जिसके जरिए पता चलता हो कि दिल्ली में 3 साल से रह रहे हैं।
- एम्स, एलएनजेपी हॉस्पिटल, हिंदूराव हॉस्पिटल, सफदरजंग हॉस्पिटल, गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल, राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल और इंस्टिट्यूट बिहेवियर ऐंड अलाइड साइंस आदि से बनवाया गया मेडिकर सर्टिफिकेट जिससे पता चलता हो कि विकलांगता सर्टिफिकेट बनने की सीमा आती है या नहीं।
- गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाी हुई दो पासपोर्ट साइज फोटो।
- हैंडिकेप कार्ड ऐप्लिकेंट को तभी सौंपा जाएगा, जब वह कार्ड रिसीव करने के लिए खुद मौजूद होगा और कार्ड पर साइन करेगा।
फीस
पहली बार फ्री, उसके बाद बनवाने पर हर बार 10 रुपये।
वक्त
21 दिनों में कार्ड बन जाता है।
मैरिज सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- शादी के बाद पासपोर्ट, बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जाता है।
- पति-पत्नी को किसी भी देश का वीजा लेते वक्त अगर या प्रूफ करना है कि वे पति-पत्नी हैं।
- पति-पत्नी में कोई भी विदेश में नौकरी कर रहा है तो उसके साथ रहने के लिए डॉक्युमेंट्स जुटाने के लिए
- बैंक में नॉमिनी, इंश्योरेंस या जमीन-विवाद में हिस्से में पति या पत्नी के प्रूफ के तौर पर।
किसके लिए कौन सा सर्टिफिकेट
- शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए दो तरह के सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं।
- हिंदू मैरिज ऐक्ट के अनुसार: हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिख या इन धर्मों को स्वीकार करने वाले।
- स्पेशन मैरिज ऐक्ट के अनुसार: पति-पत्नी में से एक या दोनों ही हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन न हो।
कौन बनाता है
- यह सर्टिफिकेट लोकल एसडीएम ऑफिस से सुबह 9: 30 से 1 बजे तक बनवाया जा सकता है। लोकर एसडीएम ऑफिस का पता जानने के लिए goo.gl/PXGA7L पर जाएं। - districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर जाकर मैरिज सर्टिफिकेट लेने के लिए लोकल एसडीएम ऑफिस में पहले से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं।
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- पति और पत्नी का साइन किया हुआ ऐप्लिकेशन फॉर्म
- जन्म के प्रमाणपत्र, जैसे मैट्रिक्युलेशन सर्टिफिकेट/पासपोर्ट/बर्थ सर्टिफिकेट
- स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होने वालों को दिल्ली में 30 दिनों से ज्यादा रहते हुए का प्रूफ (राशन कार्जड या एरिया के एसएचओ की रिपोर्ट)
-पति और पत्नी दोनों के एफिडेविट जिसमें शादी की जगह और तारीख, जन्म की तारीख, मैरिटल स्टेटस और राष्ट्रीयता के बारे में बताया गया हो -पति-पत्नी के 2 पासपोर्ट साइज फोटो और शादी के वक्त का एक फोटो, अगर मौजूद हो तो शादी का इंविटेशन कार्ड
- अगर शादी किसी मंदिर, चर्च या गुरुद्वारा जैसे धार्मिक स्थल पर हुई है तो वहां के पुजारी से बनवाया हुआ सर्टिफिकेट
- कुछ रिश्तों जैसे भाई-बहन आदि में शादी करने की मनाही है इसलिए एक एफिडेविट इस बात के लिए देना होगा कि पति
-पत्नी दोनों ही किसी ऐसे रिश्ते में नहीं आते जिनमें शादी रजिस्टर न हो सके।
- अगर एप्लाई करने वाले तलाकशुदा हैं तो तलाक का कोर्ट ऑर्डर की अटेस्टेड कॉपी और अगर विधवा या विधुर हैं तो डेथ सर्टिफिकेट की अटेस्टेड कॉपी
- बेहतर होगा कि फीस रसीद को छोड़ कर सभी डॉक्युमेंट किसी गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवा लें।
लें तत्काल मैरिज सर्टिफिकेट
- अब 24 घंटे के भीतर मैरिज सर्टिफिकेट पाया जा सकता है।
- सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स के साथ तत्काल कैटगिरी में सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करने पर 10,000 रुपये फीस के तौर पर भरने पड़ते हैं।
फीस
- हिंदू मैरिज एक्ट में रिजस्टर होने के लिए 100 रुपये और स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होने के लिए 150 रुपये डिस्ट्रिक्ट कैशियर ऑफिस में जमा करने होंगे।
कितने दिन लगेंगे
- सर्टिफिकेट 2-4 दिनों में मिल जाता है।
डेथ सर्टिफिकेट
- वीकल, जमीन-जायदाद, बीमा पॉलिसी या बैंक अकाउंट के ट्रांस्फर के लिए
- वोटर लिस्ट या किसी भी सरकारी कागजात से नाम हटवाने के लिए
- मृत व्यक्ति के आश्रितों के पेंशन आदि के लिए
कौन करता है रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की रहती है।
- दिल्ली में यह काम एमसीडी और एनडीएमसी करती हैं। मृत्यु के 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को सूचित कर देना चाहिए।
कौन बनवा सकता है
- मृत व्यक्ति का कोई भी करीबी रिश्तेदार जैसे पत्नी, बेटा, भाई आदि
कैसे बनवाएं
- वैसे इसे एसडीएम ऑफिस से बनवाया जा सकता है लेकिन श्मशान घाटों से भी इसे बनवाया जा सकता है। श्मशान में ज्यादा सहूलियत भरा रहता है और दौड़-भाग बच जाती है।
- वक्त संबंधित नियम वही रहते हैं जो जन्म प्रमाण पत्र के लिए होते हैं।
फीस
- पहली बार बनवाने पर यह फ्री दिया जाता है लेकिन इसके बाद की कॉपी लेने पर प्रति कॉपी तकरीबन 10 रुपये का खर्च आता है।
कितना वक्त लगेगा : 21 दिन
SC/ST सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- सरकारी सहायता, स्कूल-कॉलेजों और नौकरियों में रिजर्वेशन के लिए
कौन बनाता है
- अपने एरिया के एसडीएम ऑफिस में सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक इसे बनवाया जा सकता है।
- districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर अप्लाई कर सकते हैं। - सर्टिफिकेट का स्टेटस जानने के लिए goo.gl/9Quiy2 पर जा सकते हैं।
कैसे बनता है
- पूरा भरा हुआ फॉर्म जिसे एमपी/एमएलए/काउंसलर/गजटेड ऑफिसर ने अटेस्ट किया हो।
- ऐप्लिकेशन जमा करते वक्त ऑफिस में ही एप्लिकेशन देने वाले की फोटो खींची जाती है।
- सर्टिफिकेट बनाने के पहले अथॉरिटी लोकल लेवल पर पते और जाति का वेरिफिकेशन करवाती है।
क्या डॉक्युमेंट्स जरूरी
- आयु का सर्टिफिकेट (बर्थ सर्टिफिकेट या दसवीं का सर्टिफिकेट)
- रेजिडेंस प्रूफ (राशनकार्ड, लैंडलाइनफोन का बिल आदि)
- अगर आधार नंबर नहीं है तो पैन/पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस/वोटर आईडी
- पिता, भाई, बहन या किसी ब्लड रिलेटिव मिसाल के तौर पर चाचा, ताऊ, मामा आदि के एसससी/एसटी सर्टिफिकेट की कॉपी।
- अगर सपोर्टिंग सर्टिफिकेट दिल्ली से बाहर के किसी स्टेट से बनवाया गया है तो उसे एफिडेविट देना होगा जो गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाना होगा।
- डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के लिए हर सपोर्टिंग डॉक्युमेंट की ऑरिजनल कॉपी भी लेकर जाएं।
- अगर 18 साल से कम के लड़के या लड़की का सर्टिफिकेट बनना है तब घर के वरिष्ठ सदस्य का एफिडेविट जरूरी होगा।
- अगर परिवार के किसी भी मेंबर का एससी/एसटी सर्टिफिकेट नहीं बना है तो दो सरकारी कर्मचारियों को यह लिख कर देना होगा कि सर्टिफिकेट बनवाने वाले को और उसकी कास्ट को अच्छी तरह से जानते हैं। इसके साथ ही सर्टिफाई करने वाले दोनों लोगों को अपने पहचान के डॉक्युमेंट की कॉपी भी अटैच करनी होंगी।
- अगर शादीशुदा महिला का सर्टिफिकेट बनना है तो ससुराल और मायके दोनों जगह की लोकल इंक्वायरी के बाद लोकल एसडीएम ऑफिस सर्टिफिकेट बनाता है।
फीस : फ्री, 60 दिनों में बन जाता है।
डोमिसाइल सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- दिल्ली सरकार की योजनाओं का फायदा लेने, स्कूल-कॉलेजों में एडमिशन के वक्त,
कहां बनता है
- अपने एरिया के एसडीएम ऑफिस या डीसी ऑफिस में सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- गजटेड ऑफिसर (दिल्ली या सेंट्रल गवर्मेंट) से अटेस्ट करवाया हुआ पूरा भरा एप्लिकेशन फॉर्म। एप्लिकेशन फॉर्म goo.gl/kYItjW से डाउनलोड किया जा सकता है।
- आधार नंबर, अगर आधार नंबर नहीं है तो पैनकार्ड/पासपोर्ट/ ड्राइविंग लाइसेंस/ वोटर आई कार्ड।
- अगर एप्लिकेंट की उम्र 18 साल से कम है तो एफिडेविट देना होगा।
- ऐप्लिकेंट का फोटो फॉर्म जमा करते वक्त या वैरिफिकेशन के वक्त वेब कैम से खींची जाएगी।
- अपने पते को साबित करने के लिए वोटर कार्ड, बिजली का बिल, पानी का बिल या टेलिफोन का बिल आदि की कॉपी
- आयु प्रमाणित करने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट की कॉपी, दसवीं का सर्टिफिकेट या पासपोर्ट की कॉपी
- पिछले 3 साल से दिल्ली में रहने के तीन प्रूफ मिसाल के तौर पर एजुकेशनल सर्टिफिकेट, बिजली का बिल, हाउस टैक्स या बिजली के बिल की कॉपी आदि
- जिस गजटेड ऑफिसर ने फॉर्म अटेस्ट किया है उसके आई कार्ड की कॉपी और कॉन्टैक्ट नंबर देना पड़ता है। ऐसा न करने पर फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है।
फीस - फ्री
कितने दिनों में बनेगा - 21 दिन (अधिकतम)
देरी पर लें सिटीजन चार्टर का सहारा
दिल्ली सरकार ने सिटीजन चार्टर के जरिए हर सरकारी काम को वक्त रहते करवाने के लिए तय समय सीमा रखी है। इससे ज्यादा देरी होने पर डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक ग्रीवांस कमिशन में www.delhi.gov.in/wps/wcm/connect/pgc1/public+grievances+commission/home/ पर जाकर शिकायत कर सकते हैं। शिकायत करते वक्त इन बातों का ध्यान रखें
- अपने एप्लिकेशन की रसीद और रिसीविंग की कॉपी संभाल कर रखें क्योंकि इन्ही से प्रूफ होगा कि आपके काम में देरी हो रही है।
- दिए हुए वक्त में से छुट्टियों को निकाल दें। मिलास के तौर पर अगर अगर 10 दिनों का वक्त दिया गया है तो उसमें हफ्ते की छुट्टियों के न जोड़ें।
- शिकायत करते वक्त मिले हर डॉक्युमेंट जैसे रिसीविंग आदि को संभाल कर रखें। इससे अपील में जाने की नौबत आने पर सहूलियत रहती है।अक्सर जरूरी डॉक्युमेंट्स की याद तब बहुत आती है, जब बनता काम अटक जाता है। एक्सपर्ट्स की मदद से अमित मिश्रा बता रहे हैं जरूरी डॉक्युमेंट्स बनवाने की कुंजी :
बर्थ सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी है
- स्कूल में ऐडमिशन के लिए।
- पासपोर्ट या हर ऐसा डॉक्युमेंट बनवाते वक्त जिसमें उम्र के सबूत की जरूरत होती है।
कौन करता है रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की रहती है।
- दिल्ली में यह काम एमसीडी और एनडीएमसी करती हैं।
- जन्म 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को सूचित कर देना चाहिए।
कौन बनवा सकता है
- माता-पिता या घर का सीनियर मेंबर, या करीबी रिश्तेदार जैसे चाचा, मामा आदि। नौकर या दूर के रिश्तेदार को भेज कर बनवा सकते हैं, लेकिन डॉक्युमेंट में दस्तखत करने के लिए करीबी रिश्तेदार का होना जरूरी है।
कैसे बनवाएं
-हर सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में एक फॉर्मेट पर जन्म की जानकारी लेकर एमसीडी या एनडीएमसी को दे दी जाती है।
- अगर तय वक्त (21 दिन) में यह सर्टिफिकेट न ले सकें तो लोकल एसडीएम ऑफिस जाकर रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। हालांकि हॉस्पिटल के जरिए रजिस्ट्रेशन करारा सहूलियत भरा रहता है।
- ऐप्लिकेशन रिसीव होने के 7 दिनों के अंदर प्रमाण पत्र देना जरूरी होता है।
फीस: पहली बार बनवाने पर यह फ्री दिया जाता है। लेकिन इसके बाद की कॉपी लेने पर प्रति कॉपी 10 रुपये का खर्च आता है।
OBC सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- नौकरियों और सरकारी योजनाओं में मिलने वाली सुविधाओं के लिए।
- स्कूल-कॉलेज में ऐडमिशन के लिए
- अपने बच्चों का ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए
कौन बनाता है
- इसे एरिया के एसडीएम या डीसी ऑफिस से सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक बनवाया जा सकता है।
कैसे बनता है
- दिल्ली सराकर ने इसे बनवाने के लिए ऑनलाइन ऐप्लिकेशन की सुविधा दे रखी है। districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर जाकर अपॉइंटमेंट लिया जा सकता है।
- यहां जाकर आप संबंधित अधिकारी से अपॉइंटमेंट लेकर सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं।
- आपको साथ में भरे हुए फॉर्म की कॉपी और जरूरी डॉक्युमेंट लेकर जाना होता है।
- पहले से वक्त लेने से आप लाइन में लगने से के झंझट और दलालों के चक्कर में पड़ने से बच जाते हैं।
जरूरी डॉक्युमेंट
- पूरा भरा हुआ फॉर्म
- आधार कार्ड या आधार एनरोलमेंट नंबर
- आई कार्ड (इनमें से कम से कम 2) जैसे- पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड
- ऐप्लिकेशन देने वाले का फोटो ऐप्लिकेशन रिसीव करने के बाद ऑफिस में ही खींची गई जाएगी।
- अपने पिता, भाई, बहन या ब्लड रिलेटिव के ओबीसी सर्टिफिकेट की कॉपी
- जहां रह रहे हैं, वहां का अड्रेस प्रूफ जैसे वोटर आईडी या बिजली, पानी या टेलिफोन (लैंडलाइन) का बिल।
परिवार की आय का प्रूफ (आईटीआर या सैलरी स्लिप)
- बेहतर होगा सभी डॉक्युमेंट्स की कॉपी गजटेड ऑफिसर या एमपी/एमएलए से अटेस्ट करा लें।
फीस: फ्री, कितना वक्त लगेगा: 60 दिन
हैंडिकैप्ड कार्ड
क्यों जरूरी
- सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन के लिए, रेलवे में सफर करते वक्त छूट के लिए
कौन बनवा सकता है
- हैंडिकैप कार्ड 40 फीसदी शारीरिक विकलांग (हड्डी संबंधी), 35 फीसदी मानसिक विकलांग, 90 फीसदी तक अंधापन, 90 फीसदी तक बहरापन और पूरी तरह से गूंगा इंसान ही बनवा सकता है।
कौन बनाता है
इसे लोकर एसडीएम ऑफिस से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बनवाया जा सकता है।
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- पूरा भरा ऐप्लिकेशन फॉर्म
- विकलांगता संबंधी डॉक्युमेंट के तौर पर गजटेड ऑफिसर से अटेस्टेड मेडिकल सर्टिफिकेट
- राशनकार्ड के पहले तीन पेजों की फोटोकॉपी जिसके जरिए पता चलता हो कि दिल्ली में 3 साल से रह रहे हैं।
- एम्स, एलएनजेपी हॉस्पिटल, हिंदूराव हॉस्पिटल, सफदरजंग हॉस्पिटल, गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल, राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल और इंस्टिट्यूट बिहेवियर ऐंड अलाइड साइंस आदि से बनवाया गया मेडिकर सर्टिफिकेट जिससे पता चलता हो कि विकलांगता सर्टिफिकेट बनने की सीमा आती है या नहीं।
- गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाी हुई दो पासपोर्ट साइज फोटो।
- हैंडिकेप कार्ड ऐप्लिकेंट को तभी सौंपा जाएगा, जब वह कार्ड रिसीव करने के लिए खुद मौजूद होगा और कार्ड पर साइन करेगा।
फीस
पहली बार फ्री, उसके बाद बनवाने पर हर बार 10 रुपये।
वक्त
21 दिनों में कार्ड बन जाता है।
मैरिज सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- शादी के बाद पासपोर्ट, बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जाता है।
- पति-पत्नी को किसी भी देश का वीजा लेते वक्त अगर या प्रूफ करना है कि वे पति-पत्नी हैं।
- पति-पत्नी में कोई भी विदेश में नौकरी कर रहा है तो उसके साथ रहने के लिए डॉक्युमेंट्स जुटाने के लिए
- बैंक में नॉमिनी, इंश्योरेंस या जमीन-विवाद में हिस्से में पति या पत्नी के प्रूफ के तौर पर।
किसके लिए कौन सा सर्टिफिकेट
- शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए दो तरह के सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं।
- हिंदू मैरिज ऐक्ट के अनुसार: हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिख या इन धर्मों को स्वीकार करने वाले।
- स्पेशन मैरिज ऐक्ट के अनुसार: पति-पत्नी में से एक या दोनों ही हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन न हो।
कौन बनाता है
- यह सर्टिफिकेट लोकल एसडीएम ऑफिस से सुबह 9: 30 से 1 बजे तक बनवाया जा सकता है। लोकर एसडीएम ऑफिस का पता जानने के लिए goo.gl/PXGA7L पर जाएं। - districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर जाकर मैरिज सर्टिफिकेट लेने के लिए लोकल एसडीएम ऑफिस में पहले से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं।
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- पति और पत्नी का साइन किया हुआ ऐप्लिकेशन फॉर्म
- जन्म के प्रमाणपत्र, जैसे मैट्रिक्युलेशन सर्टिफिकेट/पासपोर्ट/बर्थ सर्टिफिकेट
- स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होने वालों को दिल्ली में 30 दिनों से ज्यादा रहते हुए का प्रूफ (राशन कार्जड या एरिया के एसएचओ की रिपोर्ट)
-पति और पत्नी दोनों के एफिडेविट जिसमें शादी की जगह और तारीख, जन्म की तारीख, मैरिटल स्टेटस और राष्ट्रीयता के बारे में बताया गया हो -पति-पत्नी के 2 पासपोर्ट साइज फोटो और शादी के वक्त का एक फोटो, अगर मौजूद हो तो शादी का इंविटेशन कार्ड
- अगर शादी किसी मंदिर, चर्च या गुरुद्वारा जैसे धार्मिक स्थल पर हुई है तो वहां के पुजारी से बनवाया हुआ सर्टिफिकेट
- कुछ रिश्तों जैसे भाई-बहन आदि में शादी करने की मनाही है इसलिए एक एफिडेविट इस बात के लिए देना होगा कि पति
-पत्नी दोनों ही किसी ऐसे रिश्ते में नहीं आते जिनमें शादी रजिस्टर न हो सके।
- अगर एप्लाई करने वाले तलाकशुदा हैं तो तलाक का कोर्ट ऑर्डर की अटेस्टेड कॉपी और अगर विधवा या विधुर हैं तो डेथ सर्टिफिकेट की अटेस्टेड कॉपी
- बेहतर होगा कि फीस रसीद को छोड़ कर सभी डॉक्युमेंट किसी गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवा लें।
लें तत्काल मैरिज सर्टिफिकेट
- अब 24 घंटे के भीतर मैरिज सर्टिफिकेट पाया जा सकता है।
- सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स के साथ तत्काल कैटगिरी में सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करने पर 10,000 रुपये फीस के तौर पर भरने पड़ते हैं।
फीस
- हिंदू मैरिज एक्ट में रिजस्टर होने के लिए 100 रुपये और स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होने के लिए 150 रुपये डिस्ट्रिक्ट कैशियर ऑफिस में जमा करने होंगे।
कितने दिन लगेंगे
- सर्टिफिकेट 2-4 दिनों में मिल जाता है।
डेथ सर्टिफिकेट
- वीकल, जमीन-जायदाद, बीमा पॉलिसी या बैंक अकाउंट के ट्रांस्फर के लिए
- वोटर लिस्ट या किसी भी सरकारी कागजात से नाम हटवाने के लिए
- मृत व्यक्ति के आश्रितों के पेंशन आदि के लिए
कौन करता है रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की रहती है।
- दिल्ली में यह काम एमसीडी और एनडीएमसी करती हैं। मृत्यु के 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को सूचित कर देना चाहिए।
कौन बनवा सकता है
- मृत व्यक्ति का कोई भी करीबी रिश्तेदार जैसे पत्नी, बेटा, भाई आदि
कैसे बनवाएं
- वैसे इसे एसडीएम ऑफिस से बनवाया जा सकता है लेकिन श्मशान घाटों से भी इसे बनवाया जा सकता है। श्मशान में ज्यादा सहूलियत भरा रहता है और दौड़-भाग बच जाती है।
- वक्त संबंधित नियम वही रहते हैं जो जन्म प्रमाण पत्र के लिए होते हैं।
फीस
- पहली बार बनवाने पर यह फ्री दिया जाता है लेकिन इसके बाद की कॉपी लेने पर प्रति कॉपी तकरीबन 10 रुपये का खर्च आता है।
कितना वक्त लगेगा : 21 दिन
SC/ST सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- सरकारी सहायता, स्कूल-कॉलेजों और नौकरियों में रिजर्वेशन के लिए
कौन बनाता है
- अपने एरिया के एसडीएम ऑफिस में सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक इसे बनवाया जा सकता है।
- districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर अप्लाई कर सकते हैं। - सर्टिफिकेट का स्टेटस जानने के लिए goo.gl/9Quiy2 पर जा सकते हैं।
कैसे बनता है
- पूरा भरा हुआ फॉर्म जिसे एमपी/एमएलए/काउंसलर/गजटेड ऑफिसर ने अटेस्ट किया हो।
- ऐप्लिकेशन जमा करते वक्त ऑफिस में ही एप्लिकेशन देने वाले की फोटो खींची जाती है।
- सर्टिफिकेट बनाने के पहले अथॉरिटी लोकल लेवल पर पते और जाति का वेरिफिकेशन करवाती है।
क्या डॉक्युमेंट्स जरूरी
- आयु का सर्टिफिकेट (बर्थ सर्टिफिकेट या दसवीं का सर्टिफिकेट)
- रेजिडेंस प्रूफ (राशनकार्ड, लैंडलाइनफोन का बिल आदि)
- अगर आधार नंबर नहीं है तो पैन/पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस/वोटर आईडी
- पिता, भाई, बहन या किसी ब्लड रिलेटिव मिसाल के तौर पर चाचा, ताऊ, मामा आदि के एसससी/एसटी सर्टिफिकेट की कॉपी।
- अगर सपोर्टिंग सर्टिफिकेट दिल्ली से बाहर के किसी स्टेट से बनवाया गया है तो उसे एफिडेविट देना होगा जो गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाना होगा।
- डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के लिए हर सपोर्टिंग डॉक्युमेंट की ऑरिजनल कॉपी भी लेकर जाएं।
- अगर 18 साल से कम के लड़के या लड़की का सर्टिफिकेट बनना है तब घर के वरिष्ठ सदस्य का एफिडेविट जरूरी होगा।
- अगर परिवार के किसी भी मेंबर का एससी/एसटी सर्टिफिकेट नहीं बना है तो दो सरकारी कर्मचारियों को यह लिख कर देना होगा कि सर्टिफिकेट बनवाने वाले को और उसकी कास्ट को अच्छी तरह से जानते हैं। इसके साथ ही सर्टिफाई करने वाले दोनों लोगों को अपने पहचान के डॉक्युमेंट की कॉपी भी अटैच करनी होंगी।
- अगर शादीशुदा महिला का सर्टिफिकेट बनना है तो ससुराल और मायके दोनों जगह की लोकल इंक्वायरी के बाद लोकल एसडीएम ऑफिस सर्टिफिकेट बनाता है।
फीस : फ्री, 60 दिनों में बन जाता है।
डोमिसाइल सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- दिल्ली सरकार की योजनाओं का फायदा लेने, स्कूल-कॉलेजों में एडमिशन के वक्त,
कहां बनता है
- अपने एरिया के एसडीएम ऑफिस या डीसी ऑफिस में सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- गजटेड ऑफिसर (दिल्ली या सेंट्रल गवर्मेंट) से अटेस्ट करवाया हुआ पूरा भरा एप्लिकेशन फॉर्म। एप्लिकेशन फॉर्म goo.gl/kYItjW से डाउनलोड किया जा सकता है।
- आधार नंबर, अगर आधार नंबर नहीं है तो पैनकार्ड/पासपोर्ट/ ड्राइविंग लाइसेंस/ वोटर आई कार्ड।
- अगर एप्लिकेंट की उम्र 18 साल से कम है तो एफिडेविट देना होगा।
- ऐप्लिकेंट का फोटो फॉर्म जमा करते वक्त या वैरिफिकेशन के वक्त वेब कैम से खींची जाएगी।
- अपने पते को साबित करने के लिए वोटर कार्ड, बिजली का बिल, पानी का बिल या टेलिफोन का बिल आदि की कॉपी
- आयु प्रमाणित करने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट की कॉपी, दसवीं का सर्टिफिकेट या पासपोर्ट की कॉपी
- पिछले 3 साल से दिल्ली में रहने के तीन प्रूफ मिसाल के तौर पर एजुकेशनल सर्टिफिकेट, बिजली का बिल, हाउस टैक्स या बिजली के बिल की कॉपी आदि
- जिस गजटेड ऑफिसर ने फॉर्म अटेस्ट किया है उसके आई कार्ड की कॉपी और कॉन्टैक्ट नंबर देना पड़ता है। ऐसा न करने पर फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है।
फीस - फ्री
कितने दिनों में बनेगा - 21 दिन (अधिकतम)
देरी पर लें सिटीजन चार्टर का सहारा
दिल्ली सरकार ने सिटीजन चार्टर के जरिए हर सरकारी काम को वक्त रहते करवाने के लिए तय समय सीमा रखी है। इससे ज्यादा देरी होने पर डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक ग्रीवांस कमिशन में www.delhi.gov.in/wps/wcm/connect/pgc1/public+grievances+commission/home/ पर जाकर शिकायत कर सकते हैं। शिकायत करते वक्त इन बातों का ध्यान रखें
- अपने एप्लिकेशन की रसीद और रिसीविंग की कॉपी संभाल कर रखें क्योंकि इन्ही से प्रूफ होगा कि आपके काम में देरी हो रही है।
- दिए हुए वक्त में से छुट्टियों को निकाल दें। मिलास के तौर पर अगर अगर 10 दिनों का वक्त दिया गया है तो उसमें हफ्ते की छुट्टियों के न जोड़ें।
- शिकायत करते वक्त मिले हर डॉक्युमेंट जैसे रिसीविंग आदि को संभाल कर रखें। इससे अपील में जाने की नौबत आने पर सहूलियत रहती है।
बर्थ सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी है
- स्कूल में ऐडमिशन के लिए।
- पासपोर्ट या हर ऐसा डॉक्युमेंट बनवाते वक्त जिसमें उम्र के सबूत की जरूरत होती है।
कौन करता है रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की रहती है।
- दिल्ली में यह काम एमसीडी और एनडीएमसी करती हैं।
- जन्म 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को सूचित कर देना चाहिए।
कौन बनवा सकता है
- माता-पिता या घर का सीनियर मेंबर, या करीबी रिश्तेदार जैसे चाचा, मामा आदि। नौकर या दूर के रिश्तेदार को भेज कर बनवा सकते हैं, लेकिन डॉक्युमेंट में दस्तखत करने के लिए करीबी रिश्तेदार का होना जरूरी है।
कैसे बनवाएं
-हर सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में एक फॉर्मेट पर जन्म की जानकारी लेकर एमसीडी या एनडीएमसी को दे दी जाती है।
- अगर तय वक्त (21 दिन) में यह सर्टिफिकेट न ले सकें तो लोकल एसडीएम ऑफिस जाकर रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। हालांकि हॉस्पिटल के जरिए रजिस्ट्रेशन करारा सहूलियत भरा रहता है।
- ऐप्लिकेशन रिसीव होने के 7 दिनों के अंदर प्रमाण पत्र देना जरूरी होता है।
फीस: पहली बार बनवाने पर यह फ्री दिया जाता है। लेकिन इसके बाद की कॉपी लेने पर प्रति कॉपी 10 रुपये का खर्च आता है।
OBC सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- नौकरियों और सरकारी योजनाओं में मिलने वाली सुविधाओं के लिए।
- स्कूल-कॉलेज में ऐडमिशन के लिए
- अपने बच्चों का ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए
कौन बनाता है
- इसे एरिया के एसडीएम या डीसी ऑफिस से सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक बनवाया जा सकता है।
कैसे बनता है
- दिल्ली सराकर ने इसे बनवाने के लिए ऑनलाइन ऐप्लिकेशन की सुविधा दे रखी है। districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर जाकर अपॉइंटमेंट लिया जा सकता है।
- यहां जाकर आप संबंधित अधिकारी से अपॉइंटमेंट लेकर सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं।
- आपको साथ में भरे हुए फॉर्म की कॉपी और जरूरी डॉक्युमेंट लेकर जाना होता है।
- पहले से वक्त लेने से आप लाइन में लगने से के झंझट और दलालों के चक्कर में पड़ने से बच जाते हैं।
जरूरी डॉक्युमेंट
- पूरा भरा हुआ फॉर्म
- आधार कार्ड या आधार एनरोलमेंट नंबर
- आई कार्ड (इनमें से कम से कम 2) जैसे- पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड
- ऐप्लिकेशन देने वाले का फोटो ऐप्लिकेशन रिसीव करने के बाद ऑफिस में ही खींची गई जाएगी।
- अपने पिता, भाई, बहन या ब्लड रिलेटिव के ओबीसी सर्टिफिकेट की कॉपी
- जहां रह रहे हैं, वहां का अड्रेस प्रूफ जैसे वोटर आईडी या बिजली, पानी या टेलिफोन (लैंडलाइन) का बिल।
परिवार की आय का प्रूफ (आईटीआर या सैलरी स्लिप)
- बेहतर होगा सभी डॉक्युमेंट्स की कॉपी गजटेड ऑफिसर या एमपी/एमएलए से अटेस्ट करा लें।
फीस: फ्री, कितना वक्त लगेगा: 60 दिन
हैंडिकैप्ड कार्ड
क्यों जरूरी
- सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन के लिए, रेलवे में सफर करते वक्त छूट के लिए
कौन बनवा सकता है
- हैंडिकैप कार्ड 40 फीसदी शारीरिक विकलांग (हड्डी संबंधी), 35 फीसदी मानसिक विकलांग, 90 फीसदी तक अंधापन, 90 फीसदी तक बहरापन और पूरी तरह से गूंगा इंसान ही बनवा सकता है।
कौन बनाता है
इसे लोकर एसडीएम ऑफिस से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बनवाया जा सकता है।
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- पूरा भरा ऐप्लिकेशन फॉर्म
- विकलांगता संबंधी डॉक्युमेंट के तौर पर गजटेड ऑफिसर से अटेस्टेड मेडिकल सर्टिफिकेट
- राशनकार्ड के पहले तीन पेजों की फोटोकॉपी जिसके जरिए पता चलता हो कि दिल्ली में 3 साल से रह रहे हैं।
- एम्स, एलएनजेपी हॉस्पिटल, हिंदूराव हॉस्पिटल, सफदरजंग हॉस्पिटल, गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल, राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल और इंस्टिट्यूट बिहेवियर ऐंड अलाइड साइंस आदि से बनवाया गया मेडिकर सर्टिफिकेट जिससे पता चलता हो कि विकलांगता सर्टिफिकेट बनने की सीमा आती है या नहीं।
- गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाी हुई दो पासपोर्ट साइज फोटो।
- हैंडिकेप कार्ड ऐप्लिकेंट को तभी सौंपा जाएगा, जब वह कार्ड रिसीव करने के लिए खुद मौजूद होगा और कार्ड पर साइन करेगा।
फीस
पहली बार फ्री, उसके बाद बनवाने पर हर बार 10 रुपये।
वक्त
21 दिनों में कार्ड बन जाता है।
मैरिज सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- शादी के बाद पासपोर्ट, बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जाता है।
- पति-पत्नी को किसी भी देश का वीजा लेते वक्त अगर या प्रूफ करना है कि वे पति-पत्नी हैं।
- पति-पत्नी में कोई भी विदेश में नौकरी कर रहा है तो उसके साथ रहने के लिए डॉक्युमेंट्स जुटाने के लिए
- बैंक में नॉमिनी, इंश्योरेंस या जमीन-विवाद में हिस्से में पति या पत्नी के प्रूफ के तौर पर।
किसके लिए कौन सा सर्टिफिकेट
- शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए दो तरह के सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं।
- हिंदू मैरिज ऐक्ट के अनुसार: हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिख या इन धर्मों को स्वीकार करने वाले।
- स्पेशन मैरिज ऐक्ट के अनुसार: पति-पत्नी में से एक या दोनों ही हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन न हो।
कौन बनाता है
- यह सर्टिफिकेट लोकल एसडीएम ऑफिस से सुबह 9: 30 से 1 बजे तक बनवाया जा सकता है। लोकर एसडीएम ऑफिस का पता जानने के लिए goo.gl/PXGA7L पर जाएं। - districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर जाकर मैरिज सर्टिफिकेट लेने के लिए लोकल एसडीएम ऑफिस में पहले से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं।
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- पति और पत्नी का साइन किया हुआ ऐप्लिकेशन फॉर्म
- जन्म के प्रमाणपत्र, जैसे मैट्रिक्युलेशन सर्टिफिकेट/पासपोर्ट/बर्थ सर्टिफिकेट
- स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होने वालों को दिल्ली में 30 दिनों से ज्यादा रहते हुए का प्रूफ (राशन कार्जड या एरिया के एसएचओ की रिपोर्ट)
-पति और पत्नी दोनों के एफिडेविट जिसमें शादी की जगह और तारीख, जन्म की तारीख, मैरिटल स्टेटस और राष्ट्रीयता के बारे में बताया गया हो -पति-पत्नी के 2 पासपोर्ट साइज फोटो और शादी के वक्त का एक फोटो, अगर मौजूद हो तो शादी का इंविटेशन कार्ड
- अगर शादी किसी मंदिर, चर्च या गुरुद्वारा जैसे धार्मिक स्थल पर हुई है तो वहां के पुजारी से बनवाया हुआ सर्टिफिकेट
- कुछ रिश्तों जैसे भाई-बहन आदि में शादी करने की मनाही है इसलिए एक एफिडेविट इस बात के लिए देना होगा कि पति
-पत्नी दोनों ही किसी ऐसे रिश्ते में नहीं आते जिनमें शादी रजिस्टर न हो सके।
- अगर एप्लाई करने वाले तलाकशुदा हैं तो तलाक का कोर्ट ऑर्डर की अटेस्टेड कॉपी और अगर विधवा या विधुर हैं तो डेथ सर्टिफिकेट की अटेस्टेड कॉपी
- बेहतर होगा कि फीस रसीद को छोड़ कर सभी डॉक्युमेंट किसी गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवा लें।
लें तत्काल मैरिज सर्टिफिकेट
- अब 24 घंटे के भीतर मैरिज सर्टिफिकेट पाया जा सकता है।
- सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स के साथ तत्काल कैटगिरी में सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करने पर 10,000 रुपये फीस के तौर पर भरने पड़ते हैं।
फीस
- हिंदू मैरिज एक्ट में रिजस्टर होने के लिए 100 रुपये और स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होने के लिए 150 रुपये डिस्ट्रिक्ट कैशियर ऑफिस में जमा करने होंगे।
कितने दिन लगेंगे
- सर्टिफिकेट 2-4 दिनों में मिल जाता है।
डेथ सर्टिफिकेट
- वीकल, जमीन-जायदाद, बीमा पॉलिसी या बैंक अकाउंट के ट्रांस्फर के लिए
- वोटर लिस्ट या किसी भी सरकारी कागजात से नाम हटवाने के लिए
- मृत व्यक्ति के आश्रितों के पेंशन आदि के लिए
कौन करता है रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की रहती है।
- दिल्ली में यह काम एमसीडी और एनडीएमसी करती हैं। मृत्यु के 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को सूचित कर देना चाहिए।
कौन बनवा सकता है
- मृत व्यक्ति का कोई भी करीबी रिश्तेदार जैसे पत्नी, बेटा, भाई आदि
कैसे बनवाएं
- वैसे इसे एसडीएम ऑफिस से बनवाया जा सकता है लेकिन श्मशान घाटों से भी इसे बनवाया जा सकता है। श्मशान में ज्यादा सहूलियत भरा रहता है और दौड़-भाग बच जाती है।
- वक्त संबंधित नियम वही रहते हैं जो जन्म प्रमाण पत्र के लिए होते हैं।
फीस
- पहली बार बनवाने पर यह फ्री दिया जाता है लेकिन इसके बाद की कॉपी लेने पर प्रति कॉपी तकरीबन 10 रुपये का खर्च आता है।
कितना वक्त लगेगा : 21 दिन
SC/ST सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- सरकारी सहायता, स्कूल-कॉलेजों और नौकरियों में रिजर्वेशन के लिए
कौन बनाता है
- अपने एरिया के एसडीएम ऑफिस में सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक इसे बनवाया जा सकता है।
- districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर अप्लाई कर सकते हैं। - सर्टिफिकेट का स्टेटस जानने के लिए goo.gl/9Quiy2 पर जा सकते हैं।
कैसे बनता है
- पूरा भरा हुआ फॉर्म जिसे एमपी/एमएलए/काउंसलर/गजटेड ऑफिसर ने अटेस्ट किया हो।
- ऐप्लिकेशन जमा करते वक्त ऑफिस में ही एप्लिकेशन देने वाले की फोटो खींची जाती है।
- सर्टिफिकेट बनाने के पहले अथॉरिटी लोकल लेवल पर पते और जाति का वेरिफिकेशन करवाती है।
क्या डॉक्युमेंट्स जरूरी
- आयु का सर्टिफिकेट (बर्थ सर्टिफिकेट या दसवीं का सर्टिफिकेट)
- रेजिडेंस प्रूफ (राशनकार्ड, लैंडलाइनफोन का बिल आदि)
- अगर आधार नंबर नहीं है तो पैन/पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस/वोटर आईडी
- पिता, भाई, बहन या किसी ब्लड रिलेटिव मिसाल के तौर पर चाचा, ताऊ, मामा आदि के एसससी/एसटी सर्टिफिकेट की कॉपी।
- अगर सपोर्टिंग सर्टिफिकेट दिल्ली से बाहर के किसी स्टेट से बनवाया गया है तो उसे एफिडेविट देना होगा जो गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाना होगा।
- डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के लिए हर सपोर्टिंग डॉक्युमेंट की ऑरिजनल कॉपी भी लेकर जाएं।
- अगर 18 साल से कम के लड़के या लड़की का सर्टिफिकेट बनना है तब घर के वरिष्ठ सदस्य का एफिडेविट जरूरी होगा।
- अगर परिवार के किसी भी मेंबर का एससी/एसटी सर्टिफिकेट नहीं बना है तो दो सरकारी कर्मचारियों को यह लिख कर देना होगा कि सर्टिफिकेट बनवाने वाले को और उसकी कास्ट को अच्छी तरह से जानते हैं। इसके साथ ही सर्टिफाई करने वाले दोनों लोगों को अपने पहचान के डॉक्युमेंट की कॉपी भी अटैच करनी होंगी।
- अगर शादीशुदा महिला का सर्टिफिकेट बनना है तो ससुराल और मायके दोनों जगह की लोकल इंक्वायरी के बाद लोकल एसडीएम ऑफिस सर्टिफिकेट बनाता है।
फीस : फ्री, 60 दिनों में बन जाता है।
डोमिसाइल सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- दिल्ली सरकार की योजनाओं का फायदा लेने, स्कूल-कॉलेजों में एडमिशन के वक्त,
कहां बनता है
- अपने एरिया के एसडीएम ऑफिस या डीसी ऑफिस में सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- गजटेड ऑफिसर (दिल्ली या सेंट्रल गवर्मेंट) से अटेस्ट करवाया हुआ पूरा भरा एप्लिकेशन फॉर्म। एप्लिकेशन फॉर्म goo.gl/kYItjW से डाउनलोड किया जा सकता है।
- आधार नंबर, अगर आधार नंबर नहीं है तो पैनकार्ड/पासपोर्ट/ ड्राइविंग लाइसेंस/ वोटर आई कार्ड।
- अगर एप्लिकेंट की उम्र 18 साल से कम है तो एफिडेविट देना होगा।
- ऐप्लिकेंट का फोटो फॉर्म जमा करते वक्त या वैरिफिकेशन के वक्त वेब कैम से खींची जाएगी।
- अपने पते को साबित करने के लिए वोटर कार्ड, बिजली का बिल, पानी का बिल या टेलिफोन का बिल आदि की कॉपी
- आयु प्रमाणित करने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट की कॉपी, दसवीं का सर्टिफिकेट या पासपोर्ट की कॉपी
- पिछले 3 साल से दिल्ली में रहने के तीन प्रूफ मिसाल के तौर पर एजुकेशनल सर्टिफिकेट, बिजली का बिल, हाउस टैक्स या बिजली के बिल की कॉपी आदि
- जिस गजटेड ऑफिसर ने फॉर्म अटेस्ट किया है उसके आई कार्ड की कॉपी और कॉन्टैक्ट नंबर देना पड़ता है। ऐसा न करने पर फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है।
फीस - फ्री
कितने दिनों में बनेगा - 21 दिन (अधिकतम)
देरी पर लें सिटीजन चार्टर का सहारा
दिल्ली सरकार ने सिटीजन चार्टर के जरिए हर सरकारी काम को वक्त रहते करवाने के लिए तय समय सीमा रखी है। इससे ज्यादा देरी होने पर डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक ग्रीवांस कमिशन में www.delhi.gov.in/wps/wcm/connect/pgc1/public+grievances+commission/home/ पर जाकर शिकायत कर सकते हैं। शिकायत करते वक्त इन बातों का ध्यान रखें
- अपने एप्लिकेशन की रसीद और रिसीविंग की कॉपी संभाल कर रखें क्योंकि इन्ही से प्रूफ होगा कि आपके काम में देरी हो रही है।
- दिए हुए वक्त में से छुट्टियों को निकाल दें। मिलास के तौर पर अगर अगर 10 दिनों का वक्त दिया गया है तो उसमें हफ्ते की छुट्टियों के न जोड़ें।
- शिकायत करते वक्त मिले हर डॉक्युमेंट जैसे रिसीविंग आदि को संभाल कर रखें। इससे अपील में जाने की नौबत आने पर सहूलियत रहती है।अक्सर जरूरी डॉक्युमेंट्स की याद तब बहुत आती है, जब बनता काम अटक जाता है। एक्सपर्ट्स की मदद से अमित मिश्रा बता रहे हैं जरूरी डॉक्युमेंट्स बनवाने की कुंजी :
बर्थ सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी है
- स्कूल में ऐडमिशन के लिए।
- पासपोर्ट या हर ऐसा डॉक्युमेंट बनवाते वक्त जिसमें उम्र के सबूत की जरूरत होती है।
कौन करता है रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की रहती है।
- दिल्ली में यह काम एमसीडी और एनडीएमसी करती हैं।
- जन्म 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को सूचित कर देना चाहिए।
कौन बनवा सकता है
- माता-पिता या घर का सीनियर मेंबर, या करीबी रिश्तेदार जैसे चाचा, मामा आदि। नौकर या दूर के रिश्तेदार को भेज कर बनवा सकते हैं, लेकिन डॉक्युमेंट में दस्तखत करने के लिए करीबी रिश्तेदार का होना जरूरी है।
कैसे बनवाएं
-हर सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल में एक फॉर्मेट पर जन्म की जानकारी लेकर एमसीडी या एनडीएमसी को दे दी जाती है।
- अगर तय वक्त (21 दिन) में यह सर्टिफिकेट न ले सकें तो लोकल एसडीएम ऑफिस जाकर रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकता है। हालांकि हॉस्पिटल के जरिए रजिस्ट्रेशन करारा सहूलियत भरा रहता है।
- ऐप्लिकेशन रिसीव होने के 7 दिनों के अंदर प्रमाण पत्र देना जरूरी होता है।
फीस: पहली बार बनवाने पर यह फ्री दिया जाता है। लेकिन इसके बाद की कॉपी लेने पर प्रति कॉपी 10 रुपये का खर्च आता है।
OBC सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- नौकरियों और सरकारी योजनाओं में मिलने वाली सुविधाओं के लिए।
- स्कूल-कॉलेज में ऐडमिशन के लिए
- अपने बच्चों का ओबीसी सर्टिफिकेट बनवाने के लिए
कौन बनाता है
- इसे एरिया के एसडीएम या डीसी ऑफिस से सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक बनवाया जा सकता है।
कैसे बनता है
- दिल्ली सराकर ने इसे बनवाने के लिए ऑनलाइन ऐप्लिकेशन की सुविधा दे रखी है। districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर जाकर अपॉइंटमेंट लिया जा सकता है।
- यहां जाकर आप संबंधित अधिकारी से अपॉइंटमेंट लेकर सर्टिफिकेट बनवा सकते हैं।
- आपको साथ में भरे हुए फॉर्म की कॉपी और जरूरी डॉक्युमेंट लेकर जाना होता है।
- पहले से वक्त लेने से आप लाइन में लगने से के झंझट और दलालों के चक्कर में पड़ने से बच जाते हैं।
जरूरी डॉक्युमेंट
- पूरा भरा हुआ फॉर्म
- आधार कार्ड या आधार एनरोलमेंट नंबर
- आई कार्ड (इनमें से कम से कम 2) जैसे- पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड
- ऐप्लिकेशन देने वाले का फोटो ऐप्लिकेशन रिसीव करने के बाद ऑफिस में ही खींची गई जाएगी।
- अपने पिता, भाई, बहन या ब्लड रिलेटिव के ओबीसी सर्टिफिकेट की कॉपी
- जहां रह रहे हैं, वहां का अड्रेस प्रूफ जैसे वोटर आईडी या बिजली, पानी या टेलिफोन (लैंडलाइन) का बिल।
परिवार की आय का प्रूफ (आईटीआर या सैलरी स्लिप)
- बेहतर होगा सभी डॉक्युमेंट्स की कॉपी गजटेड ऑफिसर या एमपी/एमएलए से अटेस्ट करा लें।
फीस: फ्री, कितना वक्त लगेगा: 60 दिन
हैंडिकैप्ड कार्ड
क्यों जरूरी
- सरकारी नौकरियों में रिजर्वेशन के लिए, रेलवे में सफर करते वक्त छूट के लिए
कौन बनवा सकता है
- हैंडिकैप कार्ड 40 फीसदी शारीरिक विकलांग (हड्डी संबंधी), 35 फीसदी मानसिक विकलांग, 90 फीसदी तक अंधापन, 90 फीसदी तक बहरापन और पूरी तरह से गूंगा इंसान ही बनवा सकता है।
कौन बनाता है
इसे लोकर एसडीएम ऑफिस से सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक बनवाया जा सकता है।
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- पूरा भरा ऐप्लिकेशन फॉर्म
- विकलांगता संबंधी डॉक्युमेंट के तौर पर गजटेड ऑफिसर से अटेस्टेड मेडिकल सर्टिफिकेट
- राशनकार्ड के पहले तीन पेजों की फोटोकॉपी जिसके जरिए पता चलता हो कि दिल्ली में 3 साल से रह रहे हैं।
- एम्स, एलएनजेपी हॉस्पिटल, हिंदूराव हॉस्पिटल, सफदरजंग हॉस्पिटल, गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल, राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल और इंस्टिट्यूट बिहेवियर ऐंड अलाइड साइंस आदि से बनवाया गया मेडिकर सर्टिफिकेट जिससे पता चलता हो कि विकलांगता सर्टिफिकेट बनने की सीमा आती है या नहीं।
- गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाी हुई दो पासपोर्ट साइज फोटो।
- हैंडिकेप कार्ड ऐप्लिकेंट को तभी सौंपा जाएगा, जब वह कार्ड रिसीव करने के लिए खुद मौजूद होगा और कार्ड पर साइन करेगा।
फीस
पहली बार फ्री, उसके बाद बनवाने पर हर बार 10 रुपये।
वक्त
21 दिनों में कार्ड बन जाता है।
मैरिज सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- शादी के बाद पासपोर्ट, बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट मांगा जाता है।
- पति-पत्नी को किसी भी देश का वीजा लेते वक्त अगर या प्रूफ करना है कि वे पति-पत्नी हैं।
- पति-पत्नी में कोई भी विदेश में नौकरी कर रहा है तो उसके साथ रहने के लिए डॉक्युमेंट्स जुटाने के लिए
- बैंक में नॉमिनी, इंश्योरेंस या जमीन-विवाद में हिस्से में पति या पत्नी के प्रूफ के तौर पर।
किसके लिए कौन सा सर्टिफिकेट
- शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए दो तरह के सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं।
- हिंदू मैरिज ऐक्ट के अनुसार: हिन्दू, बौद्ध, जैन और सिख या इन धर्मों को स्वीकार करने वाले।
- स्पेशन मैरिज ऐक्ट के अनुसार: पति-पत्नी में से एक या दोनों ही हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन न हो।
कौन बनाता है
- यह सर्टिफिकेट लोकल एसडीएम ऑफिस से सुबह 9: 30 से 1 बजे तक बनवाया जा सकता है। लोकर एसडीएम ऑफिस का पता जानने के लिए goo.gl/PXGA7L पर जाएं। - districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर जाकर मैरिज सर्टिफिकेट लेने के लिए लोकल एसडीएम ऑफिस में पहले से अपॉइंटमेंट ले सकते हैं।
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- पति और पत्नी का साइन किया हुआ ऐप्लिकेशन फॉर्म
- जन्म के प्रमाणपत्र, जैसे मैट्रिक्युलेशन सर्टिफिकेट/पासपोर्ट/बर्थ सर्टिफिकेट
- स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होने वालों को दिल्ली में 30 दिनों से ज्यादा रहते हुए का प्रूफ (राशन कार्जड या एरिया के एसएचओ की रिपोर्ट)
-पति और पत्नी दोनों के एफिडेविट जिसमें शादी की जगह और तारीख, जन्म की तारीख, मैरिटल स्टेटस और राष्ट्रीयता के बारे में बताया गया हो -पति-पत्नी के 2 पासपोर्ट साइज फोटो और शादी के वक्त का एक फोटो, अगर मौजूद हो तो शादी का इंविटेशन कार्ड
- अगर शादी किसी मंदिर, चर्च या गुरुद्वारा जैसे धार्मिक स्थल पर हुई है तो वहां के पुजारी से बनवाया हुआ सर्टिफिकेट
- कुछ रिश्तों जैसे भाई-बहन आदि में शादी करने की मनाही है इसलिए एक एफिडेविट इस बात के लिए देना होगा कि पति
-पत्नी दोनों ही किसी ऐसे रिश्ते में नहीं आते जिनमें शादी रजिस्टर न हो सके।
- अगर एप्लाई करने वाले तलाकशुदा हैं तो तलाक का कोर्ट ऑर्डर की अटेस्टेड कॉपी और अगर विधवा या विधुर हैं तो डेथ सर्टिफिकेट की अटेस्टेड कॉपी
- बेहतर होगा कि फीस रसीद को छोड़ कर सभी डॉक्युमेंट किसी गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवा लें।
लें तत्काल मैरिज सर्टिफिकेट
- अब 24 घंटे के भीतर मैरिज सर्टिफिकेट पाया जा सकता है।
- सभी जरूरी डॉक्युमेंट्स के साथ तत्काल कैटगिरी में सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई करने पर 10,000 रुपये फीस के तौर पर भरने पड़ते हैं।
फीस
- हिंदू मैरिज एक्ट में रिजस्टर होने के लिए 100 रुपये और स्पेशल मैरिज ऐक्ट के तहत रजिस्टर होने के लिए 150 रुपये डिस्ट्रिक्ट कैशियर ऑफिस में जमा करने होंगे।
कितने दिन लगेंगे
- सर्टिफिकेट 2-4 दिनों में मिल जाता है।
डेथ सर्टिफिकेट
- वीकल, जमीन-जायदाद, बीमा पॉलिसी या बैंक अकाउंट के ट्रांस्फर के लिए
- वोटर लिस्ट या किसी भी सरकारी कागजात से नाम हटवाने के लिए
- मृत व्यक्ति के आश्रितों के पेंशन आदि के लिए
कौन करता है रजिस्ट्रेशन
- रजिस्ट्रेशन करने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की रहती है।
- दिल्ली में यह काम एमसीडी और एनडीएमसी करती हैं। मृत्यु के 21 दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को सूचित कर देना चाहिए।
कौन बनवा सकता है
- मृत व्यक्ति का कोई भी करीबी रिश्तेदार जैसे पत्नी, बेटा, भाई आदि
कैसे बनवाएं
- वैसे इसे एसडीएम ऑफिस से बनवाया जा सकता है लेकिन श्मशान घाटों से भी इसे बनवाया जा सकता है। श्मशान में ज्यादा सहूलियत भरा रहता है और दौड़-भाग बच जाती है।
- वक्त संबंधित नियम वही रहते हैं जो जन्म प्रमाण पत्र के लिए होते हैं।
फीस
- पहली बार बनवाने पर यह फ्री दिया जाता है लेकिन इसके बाद की कॉपी लेने पर प्रति कॉपी तकरीबन 10 रुपये का खर्च आता है।
कितना वक्त लगेगा : 21 दिन
SC/ST सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- सरकारी सहायता, स्कूल-कॉलेजों और नौकरियों में रिजर्वेशन के लिए
कौन बनाता है
- अपने एरिया के एसडीएम ऑफिस में सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक इसे बनवाया जा सकता है।
- districts.delhigovt.nic.in/choosedistrict.asp पर अप्लाई कर सकते हैं। - सर्टिफिकेट का स्टेटस जानने के लिए goo.gl/9Quiy2 पर जा सकते हैं।
कैसे बनता है
- पूरा भरा हुआ फॉर्म जिसे एमपी/एमएलए/काउंसलर/गजटेड ऑफिसर ने अटेस्ट किया हो।
- ऐप्लिकेशन जमा करते वक्त ऑफिस में ही एप्लिकेशन देने वाले की फोटो खींची जाती है।
- सर्टिफिकेट बनाने के पहले अथॉरिटी लोकल लेवल पर पते और जाति का वेरिफिकेशन करवाती है।
क्या डॉक्युमेंट्स जरूरी
- आयु का सर्टिफिकेट (बर्थ सर्टिफिकेट या दसवीं का सर्टिफिकेट)
- रेजिडेंस प्रूफ (राशनकार्ड, लैंडलाइनफोन का बिल आदि)
- अगर आधार नंबर नहीं है तो पैन/पासपोर्ट/ड्राइविंग लाइसेंस/वोटर आईडी
- पिता, भाई, बहन या किसी ब्लड रिलेटिव मिसाल के तौर पर चाचा, ताऊ, मामा आदि के एसससी/एसटी सर्टिफिकेट की कॉपी।
- अगर सपोर्टिंग सर्टिफिकेट दिल्ली से बाहर के किसी स्टेट से बनवाया गया है तो उसे एफिडेविट देना होगा जो गजटेड ऑफिसर से अटेस्ट करवाना होगा।
- डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के लिए हर सपोर्टिंग डॉक्युमेंट की ऑरिजनल कॉपी भी लेकर जाएं।
- अगर 18 साल से कम के लड़के या लड़की का सर्टिफिकेट बनना है तब घर के वरिष्ठ सदस्य का एफिडेविट जरूरी होगा।
- अगर परिवार के किसी भी मेंबर का एससी/एसटी सर्टिफिकेट नहीं बना है तो दो सरकारी कर्मचारियों को यह लिख कर देना होगा कि सर्टिफिकेट बनवाने वाले को और उसकी कास्ट को अच्छी तरह से जानते हैं। इसके साथ ही सर्टिफाई करने वाले दोनों लोगों को अपने पहचान के डॉक्युमेंट की कॉपी भी अटैच करनी होंगी।
- अगर शादीशुदा महिला का सर्टिफिकेट बनना है तो ससुराल और मायके दोनों जगह की लोकल इंक्वायरी के बाद लोकल एसडीएम ऑफिस सर्टिफिकेट बनाता है।
फीस : फ्री, 60 दिनों में बन जाता है।
डोमिसाइल सर्टिफिकेट
क्यों जरूरी
- दिल्ली सरकार की योजनाओं का फायदा लेने, स्कूल-कॉलेजों में एडमिशन के वक्त,
कहां बनता है
- अपने एरिया के एसडीएम ऑफिस या डीसी ऑफिस में सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 1 बजे तक
जरूरी डॉक्युमेंट्स
- गजटेड ऑफिसर (दिल्ली या सेंट्रल गवर्मेंट) से अटेस्ट करवाया हुआ पूरा भरा एप्लिकेशन फॉर्म। एप्लिकेशन फॉर्म goo.gl/kYItjW से डाउनलोड किया जा सकता है।
- आधार नंबर, अगर आधार नंबर नहीं है तो पैनकार्ड/पासपोर्ट/ ड्राइविंग लाइसेंस/ वोटर आई कार्ड।
- अगर एप्लिकेंट की उम्र 18 साल से कम है तो एफिडेविट देना होगा।
- ऐप्लिकेंट का फोटो फॉर्म जमा करते वक्त या वैरिफिकेशन के वक्त वेब कैम से खींची जाएगी।
- अपने पते को साबित करने के लिए वोटर कार्ड, बिजली का बिल, पानी का बिल या टेलिफोन का बिल आदि की कॉपी
- आयु प्रमाणित करने के लिए बर्थ सर्टिफिकेट की कॉपी, दसवीं का सर्टिफिकेट या पासपोर्ट की कॉपी
- पिछले 3 साल से दिल्ली में रहने के तीन प्रूफ मिसाल के तौर पर एजुकेशनल सर्टिफिकेट, बिजली का बिल, हाउस टैक्स या बिजली के बिल की कॉपी आदि
- जिस गजटेड ऑफिसर ने फॉर्म अटेस्ट किया है उसके आई कार्ड की कॉपी और कॉन्टैक्ट नंबर देना पड़ता है। ऐसा न करने पर फॉर्म रिजेक्ट हो सकता है।
फीस - फ्री
कितने दिनों में बनेगा - 21 दिन (अधिकतम)
देरी पर लें सिटीजन चार्टर का सहारा
दिल्ली सरकार ने सिटीजन चार्टर के जरिए हर सरकारी काम को वक्त रहते करवाने के लिए तय समय सीमा रखी है। इससे ज्यादा देरी होने पर डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक ग्रीवांस कमिशन में www.delhi.gov.in/wps/wcm/connect/pgc1/public+grievances+commission/home/ पर जाकर शिकायत कर सकते हैं। शिकायत करते वक्त इन बातों का ध्यान रखें
- अपने एप्लिकेशन की रसीद और रिसीविंग की कॉपी संभाल कर रखें क्योंकि इन्ही से प्रूफ होगा कि आपके काम में देरी हो रही है।
- दिए हुए वक्त में से छुट्टियों को निकाल दें। मिलास के तौर पर अगर अगर 10 दिनों का वक्त दिया गया है तो उसमें हफ्ते की छुट्टियों के न जोड़ें।
- शिकायत करते वक्त मिले हर डॉक्युमेंट जैसे रिसीविंग आदि को संभाल कर रखें। इससे अपील में जाने की नौबत आने पर सहूलियत रहती है।
Saturday, 25 July 2015
Interesting facts about Science in hindi
05:03
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1. Mickey mouse को इटालीयन भाषा में ‘Topolino'(टोपोलीनो) कहा जाता है.
2. हर साल 5 लोगों की मौत bed से नीचे गिरने से होती है. यह ज्यादातर छोटे बच्चे और बुजुर्ग होते हैं.
3. लोग सबसे ज्यादा तेज निर्णन तब लेते है जब वह वीडियो गेम खेल रहे होते हैं.
4. संसार के 90 प्रतीशत ज्वालामुखी समुंदरो में है.
5. हर साल दो मिनट ऐसे होते हैं जिन्में 61 सैकेंड होते हैं.
6. एक भारी वस्तु को समुंदर की 10 किलोमीटर गहराई तक जाने के लिए 1 घंटा लगेगा.
7. 2012 तक You-tube पर सबसे ज्यादा देखी जाने जानी वाली वीडियो ‘justin Biebar Baby ft. Ludccric’ थी जिसमें Likes से ज्यादा Dislikes थे.
8. विश्व में सुरक्षा पर किया जाने वाला कुल खर्च जहाँ 400 अरब अमरीकी डालर से अधिक है वहीं शिक्षा पर 100 अरब डालर से कम।
9.सीटी बजाना शिष्टाचार के लिहाज से अच्छी भले ही न लगे लेकिन क्या आपको पता है फेफड़ों के लिए यह बेहतरीन एक्सरसाइज है.
10.कद्दू खाने से दिमाग अच्छी तरह चलता है।सुनने में शायद अटपटा लगे लेकिन कई शोधों में यह बात मानी गई हैकि कद्दू में पाया जाने वाला विटामिन बी6 और मिनिरल्स आपके रक्त में मौजूद शर्करा को तेजी से ग्लूकोज में बदलते हैं और ग्लूकोज अकेला ऐसा तत्व है जिसका सेवन मस्तिष्क सीधे करता है। यह मस्तिष्क के काम करने की क्षमता को बढ़ाता है।
2. हर साल 5 लोगों की मौत bed से नीचे गिरने से होती है. यह ज्यादातर छोटे बच्चे और बुजुर्ग होते हैं.
3. लोग सबसे ज्यादा तेज निर्णन तब लेते है जब वह वीडियो गेम खेल रहे होते हैं.
4. संसार के 90 प्रतीशत ज्वालामुखी समुंदरो में है.
5. हर साल दो मिनट ऐसे होते हैं जिन्में 61 सैकेंड होते हैं.
6. एक भारी वस्तु को समुंदर की 10 किलोमीटर गहराई तक जाने के लिए 1 घंटा लगेगा.
7. 2012 तक You-tube पर सबसे ज्यादा देखी जाने जानी वाली वीडियो ‘justin Biebar Baby ft. Ludccric’ थी जिसमें Likes से ज्यादा Dislikes थे.
8. विश्व में सुरक्षा पर किया जाने वाला कुल खर्च जहाँ 400 अरब अमरीकी डालर से अधिक है वहीं शिक्षा पर 100 अरब डालर से कम।
9.सीटी बजाना शिष्टाचार के लिहाज से अच्छी भले ही न लगे लेकिन क्या आपको पता है फेफड़ों के लिए यह बेहतरीन एक्सरसाइज है.
10.कद्दू खाने से दिमाग अच्छी तरह चलता है।सुनने में शायद अटपटा लगे लेकिन कई शोधों में यह बात मानी गई हैकि कद्दू में पाया जाने वाला विटामिन बी6 और मिनिरल्स आपके रक्त में मौजूद शर्करा को तेजी से ग्लूकोज में बदलते हैं और ग्लूकोज अकेला ऐसा तत्व है जिसका सेवन मस्तिष्क सीधे करता है। यह मस्तिष्क के काम करने की क्षमता को बढ़ाता है।
Friday, 24 July 2015
Interesting facts about Science in hindi
00:32
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1. आम तौर पे classes में पढ़ाया जाता है कि प्रकाश की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सैकेंड होती है. पर असल में यह गति 2,99,792 किलोमीटर प्रति सैकेंड होती है. यह 1,86,287 मील प्रति सैकेंड के बराबर होती है.
2. हर एक सैकेंड में 100 बार आसमानी बिजली धरती पर गिरती है.
3. हर साल आसमानी बिजली से 1000 लोग मारे जाते हैं.
4. October 1992 में लंडन के जितना बड़ा बर्फ का तौदा Antarctic से टुट कर अलग हो गया था.
5. दुनिया के सबसे महंगे पदार्थ की कीमत सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। इसका नाम जानने के बाद आप ये सोंच भी नहीं सकेंगे कि वाकई में इसकी कीमत इतनी ज्यादा होगी। आपमें से ज्यादातर लोग इसे सोना, चांदी या हीरा मान रहे होंगे। अगर ऐसा है तो आपको गलतफहमी में है दुनिया की सबसे महंगा पदार्थ एंटीमैटर (प्रतिपदार्थ) है। प्रतिपदार्थ पदार्थ का एक ऐसा प्रकार है जो प्रतिकणों जैसे पाजीट्रान, प्रति-प्रोटान, प्रति-न्युट्रान मे बना होता है. ये प्रति-प्रोटान और प्रति- न्युट्रान प्रति क्वार्कों मे बने होते हैं. इसकी कीमत सुनकर आपके होश उड़ जायेंगे। 1 ग्राम प्रतिपदार्थ को बेचकर दुनिया के 100 छोटे-छोटे देशों को खरीदा जा सकता है। जी हां,1 ग्राम प्रतिपदार्थ की कीमत 31 लाख 25 हजार करोड़ रुपये है। नासा के अनुसार,प्रतिपदार्थ धरती का सबसे महंगा मैटीरियल है। 1 मिलिग्राम प्रतिपदार्थ बनाने में 160 करोड़ रुपये तक लग जाते हैं। जहां यह बनता है, वहां पर दुनिया की सबसे अच्छी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। इतना ही नहीं नासा जैसे संस्थानों में भी इसे रखने के लिए एक मजबुत सुरक्षा घेरा है। कुछ खास लोगों के अलावा प्रतिपदार्थ तक कोई भी नहीं पहुंच सकता है। दिलचस्प है कि प्रतिपदार्थ का इस्तेमाल अंतरिक्ष में दूसरे ग्रहों पर जाने वाले विमानों में ईधन की तरह किया जा सकता है।
6. अगर हम प्रकाश की गति से अपनी नजदीकी गैलैक्सी(Galaxy) पर जाना चाहे तो हमें 20 साल लगेगें.
7. हवा तब तक आवाज नही करती जब यह किसी वस्तु के विपरीत न चले.
8. अगर किसी एक आकाश गंगा के सारे तारे नमक के दाने जितने हो जाए तो वह पूरा का पूरा Olympic swimming pool भर सकते हैं.
9. क्विक सिल्वर या पारा ऐसी एकमात्र धातु है, जो तरल अवस्था में रहती है और इतनी भारी होती है कि इस पर लोहा भी तैरता है|
10. जब पानी से बर्फ बन रही होती तो लगभग 10% पानी तो उड़ ही जाता है. इसलिए ही हमारे फ्रिज में Tray (ट्रे) पर पानी जमा हो जाता है.
11. प्रकाश को धरती की यात्रा करने के लिए सिर्फ 0.13 सैकेंड लगेगें.
12. विश्व की सबसे भारी धातु ऑस्मियम है।इसकी 2 फुट लंबी, चौड़ी वऊँची सिल्ली का वज़न एक हाथी के बराबर होता है।
13. नाभिकीय भट्टियों में प्रयुक्त गुरु-जल विश्व का सबसे महँगा पानी है। इसके एक लीटर का मूल्य लगभग
13,500 रुपये होता है।
14. शरीर पर लगाए जाने वाले सुगंधित पाउडर को टैल्कम पाउडर इसलिए कहते हैं क्योंकि वह ‘टैल्क’ नामक पत्थर से बनाया जाता है।
15. वैज्ञानिकों ने बताया है कि मुर्गी अंड़े से पहले आई थी क्योंकि वह प्रोटीन जो अंड़ो के cells को बनाता है केवल मुर्गीयों में ही पाया जाता है.
16. 1894 में जो सबसे पहला कैमरा बना था उससे आपको अपनी फोटो खिचवाने के लिए उसके सामने 8 घंटे तक बैठना पड़ेगा.
17. नील आर्मस्ट्राँग ने सबसे पहले अपना बाँया पैर चँद्रमा पर रखा था और उस समय उनके दिल की धड़कन 156 बार प्रति मिनट थी.
18. अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात तारा Canis Majoris (केनिस मीजोरिस) है. यह इतना बड़ा है कि इसमें 7 000 000 000 000 000 पृथ्वीयाँ समा सकती हैं. दुसरे शब्दों में अगर पृथ्वी का आकार अक मटर के दाने जितना क
दिया जाए तो Canis Majoris का व्यास(diameter) 3 किलोमीटर होगा.
19. सूर्यमंडल के बाहर सबसे पहले खोजा जानेवाला ग्रह 1990 में खोजा गया था. हमारे ब्रहाम्ण्ड में लगभग 40*10 21 ग्रह हैं. पर अबी तक सिर्फ 800 ग्रह ही खोजे हए हैं.
20. जैसा के ऊपर बताया हया है कि सबसे बड़ा ज्ञात तारा केनिस मीजोरिम है. इसका अर्धव्यास हमारे सुर्य से 600 हुना ज्यादा है जबकि वजन(द्रव्यमान) सिर्फ 30 गुना ज्यादा.
Wednesday, 22 July 2015
अब रेलगाड़ियों में भी मिलेंगे केएफसी के व्यंजन
05:17
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नई दिल्ली : केएफसी लवर्स के लिए एक खुशखबरी है, क्योंकि वे लोग अब भारतीय रेलवे की कई ट्रेनों में केएफसी के खाने को एंजॉय कर सकेंगे। केएफसी ने अपने फास्ट फूड चेन को बढ़ाने के लिए आईआरसीटीसी से पार्टनरशिप कर ली है, जिसमें उन्होंने यात्रियों के लिए डिलीवरी का विकल्प रखा है।
20 जुलाई से रेलवे में यात्रा करने वाले लोग आईआरसीटीसी से टिकट बुक कराते समय केएफसी के खाने का आर्डर दे सकते हैं, ई-कैटरिंग सेवा के तहत केएफसी ने यह बयान दिया है।
फिलहाल, यह सुविधा नई दिल्ली स्टेशन से गुजरने वाली कुछ 12 ट्रेनों में ही उपलब्ध की गई है। यह सेवा अगले 10 दिन में हैदराबाद, विशाखापटनम और बैंगलुरु में भी शुरू की जाएगी।
बयान के मुताबिक, यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर जाकर या 18001034139 टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर आर्डर दे सकते हैं। इस दौरान केएफसी द्वारा यात्री के मोबाइल पर पासवर्ड भेजा जाएगा, जिसमें डिलीवरी के समय की जानकारी होगी। यह सेवा बहुत कम ट्रेनों में दी गई है, जिनमें पैंट्री कार की सुविधा नहीं है। बाद में यह व्यवस्था राजधानी और दुरुंतो जैसी ट्रेनों में भी दी जाएगी।
ई-केटरिंग सर्विस द्वारा किया गया यह संयुक्त प्रयास केएफसी और आईआरसीटीसी से यात्रियों को ताज़ा खाना उपलब्ध कराने की है।
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